उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ प्रशासन का अभियान एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। ताजा मामला बरेली जिले का है जहाँ रामपुर रोड स्थित सीबीगंज इंटर कॉलेज मार्ग पर नगर निगम ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। लंबे समय से सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझकर उस पर काबिज लोगों को अब प्रशासन ने अंतिम चेतावनी दे दी है। नगर निगम की इस कार्रवाई ने क्षेत्र के उन रसूखदारों और कब्जाधारकों के बीच हड़कंप मचा दिया है जिन्होंने सार्वजनिक नाले और सड़क की जमीन को दबाकर वहां पक्के निर्माण खड़े कर लिए हैं। निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित अवधि में कब्जा खुद नहीं हटाया गया तो वहां बुलडोजर का चलना तय है।
पैमाइश में खुली अवैध कब्जे की पोल
इस पूरे मामले की जड़ नगर निगम के उन अभिलेखों में छिपी है जिसमें बरेली-रामपुर रोड की चौड़ाई का स्पष्ट उल्लेख है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस मार्ग की निर्धारित चौड़ाई पचपन मीटर दर्ज है। काफी समय से मिल रही शिकायतों के बाद जब नगर निगम की टीम ने मानचित्रकार के साथ मौके पर पहुंचकर वास्तविक पैमाइश की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। धरातल पर सड़क की चौड़ाई केवल सैंतालीस मीटर ही पाई गई। नाप-जोख के दौरान यह पूरी तरह साफ हो गया कि लगभग छह मीटर चौड़ाई में सरकारी मार्ग और नाले की जमीन पर पक्का निर्माण कर अतिक्रमण किया गया है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर किए गए इस निर्माण ने यातायात और जल निकासी दोनों के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
बुलडोजर की कार्रवाई और भारी जुर्माने की तैयारी
नगर निगम के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार राठी ने इस मामले में बेहद कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि संबंधित अतिक्रमणकारियों को नोटिस थमाते हुए पंद्रह दिन के भीतर कब्जा हटाने का समय दिया गया है। प्रशासन ने साफ कहा है कि इस अवधि के बाद बिना किसी सूचना के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। यह कार्रवाई केवल निर्माण गिराने तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि उच्चतम न्यायालय की गाइडलाइंस का पालन करते हुए अतिक्रमणकारियों से ही बुलडोजर चलाने का खर्च भी वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में संबंधित पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है।
अतिक्रमणकारियों में मचा हड़कंप
प्रशासन की इस सक्रियता ने इलाके में खलबली पैदा कर दी है। नगर निगम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सड़क निगम के प्रबंधन और पूर्ण अध्यास में आती है इसलिए यहां किसी भी तरह का निजी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी नाले के ऊपर किए गए निर्माण के कारण बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या विकराल हो जाती है जिसे देखते हुए अब निगम पीछे हटने के मूड में नहीं है। पंद्रह दिन की यह मोहलत उन लोगों के लिए आखिरी मौका है जो कानून को दरकिनार कर सरकारी जमीन का उपभोग कर रहे थे। अब क्षेत्र के लोग टकटकी लगाए बैठे हैं कि क्या अतिक्रमणकारी स्वयं कब्जा हटाएंगे या फिर बाबा का बुलडोजर एक बार फिर अपनी ताकत दिखाएगा।
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