उत्तर प्रदेश के हाथरस में दबंगों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे आम नागरिक की संपत्ति पर सरेआम डाका डालने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। ताजा मामला कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र की आनंदपुरी कॉलोनी का है, जहाँ एक व्यक्ति ने सत्ता के रसूख और बाहुबल के दम पर अपनी पुश्तैनी जमीन गंवाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित उमाशंकर का आरोप है कि पूर्व ब्लॉक प्रमुख के पति हेम सिंह ठेनुआ ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर न केवल उनकी जमीन पर हो रहे निर्माण कार्य को रुकवाया, बल्कि विरोध करने पर उनके साथ हिंसक मारपीट भी की। यह मामला स्थानीय राजनीति और आपराधिक गठजोड़ की ओर इशारा कर रहा है, जहाँ रसूखदार लोग कानून को अपनी जेब में रखकर चल रहे हैं।
दिनदहाड़े गुंडागर्दी और जातिसूचक गालियों की बौछार
घटनाक्रम की शुरुआत 19 दिसंबर को हुई जब उमाशंकर नगला उम्मेद स्थित अपनी निजी जमीन पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण करा रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान हेम सिंह ठेनुआ, हरेंद्र, रानवेंद्र उर्फ रानू, रोहित, अजीत, जितेंद्र और आदित्य अपने साथ करीब एक दर्जन अज्ञात हमलावरों को लेकर मौके पर धमके। इन लोगों ने न केवल काम को जबरन बंद करवाया बल्कि पीड़ित के साथ अभद्रता की सारी सीमाएं लांघ दीं। पीड़ित का दावा है कि आरोपियों ने उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और बीच बचाव करने आए लोगों के साथ भी मारपीट की गई। यह पूरी वारदात दिखाती है कि किस तरह भीड़तंत्र का सहारा लेकर एक व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का गला घोंटा गया।
रात के अंधेरे में जेसीबी से तांडव और तबाही
दबंगों की हिमाकत यहीं नहीं रुकी। जब पीड़ित ने अगले दिन दोबारा काम शुरू करने का साहस दिखाया, तो आरोपियों ने और भी उग्र रूप धारण कर लिया। 20 दिसंबर की रात को जेसीबी मशीन का इस्तेमाल कर खेत में लगे नीम के पुराने पेड़ों को उखाड़ फेंका गया। इसके अगले ही दिन दबंगों ने करीब 120 फीट लंबी बाउंड्रीवॉल को पूरी तरह जमींदोज कर दिया। रात के सन्नाटे में हुई इस तबाही ने स्पष्ट कर दिया कि आरोपियों को कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है। पीड़ित को अब अपनी जान का डर सता रहा है क्योंकि उसे साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि दोबारा बाउंड्रीवॉल खड़ी करने की कोशिश की, तो उसे गोलियों से भून दिया जाएगा।
पुलिसिया कार्रवाई और न्याय की उम्मीद
इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे थे, लेकिन अंततः 31 दिसंबर को पुलिस ने सातों नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीओ सिटी योगेंद्र कृष्ण नारायण ने पुष्टि की है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस की टीमें साक्ष्यों का संकलन कर रही हैं। हालांकि, पीड़ित परिवार अभी भी दहशत के साये में जीने को मजबूर है। सवाल यह उठता है कि क्या हाथरस पुलिस इन रसूखदार आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर पाएगी या फिर जांच की फाइलें सत्ता के दबाव में कहीं दबकर रह जाएंगी। जनता की नजरें अब खाकी के अगले कदम पर टिकी हैं।
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