उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। जिले के कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव ग्यासपुर में जमीन के एक टुकड़े को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते खूनी खेल में तब्दील हो गया। इस हिंसक झड़प में पूर्व विधायक मरहूम हाजी अलीम के भतीजे सूफियान की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। महज 43 वर्ष की आयु में सूफियान की मौत ने न केवल उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरेआम हुई इस हत्या से पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल व्याप्त है और लोग इस बर्बरता को देखकर स्तब्ध हैं।
पैमाइश के दौरान अचानक भड़की हिंसा
घटना की जड़ें जमीन की पैमाइश से जुड़ी हुई हैं। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश के मुताबिक, सूफियान और उनका 45 वर्षीय भाई अकरम नीमखेड़ा के पास स्थित अपने एक बाग की पैमाइश के लिए गए थे। वहां पहले से ही विवाद की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह विवाद जानलेवा साबित होगा। पैमाइश की प्रक्रिया के दौरान ही दूसरे पक्ष से कहासुनी शुरू हुई और देखते ही देखते गाली-गलौज और धक्का-मुक्की होने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हमलावरों ने पूरी तैयारी के साथ लाठी-डंडों से हमला बोला था। सूफियान और अकरम को संभलने तक का मौका नहीं मिला और उन पर ताबड़तोड़ वार किए गए।
अस्पताल में पसरा सन्नाटा और तनाव
हमले में बुरी तरह जख्मी दोनों भाइयों को आनन-फानन में जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां की स्थिति बेहद हृदयविदारक थी। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद ही सूफियान को मृत घोषित कर दिया, जिससे वहां मौजूद समर्थकों और परिजनों में कोहराम मच गया। अकरम की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और वह अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। जैसे ही यह खबर शहर में फैली, जिला अस्पताल के बाहर भारी भीड़ जमा होने लगी। लोगों के गुस्से और संवेदनशील स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए।
पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा के इंतजाम
वारदात की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी दिनेश कुमार सिंह खुद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अस्पताल में घायल पक्ष से जानकारी जुटाई। पुलिस ने सूफियान के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के सटीक कारणों और चोटों की तीव्रता का आधिकारिक विवरण मिल सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। फिलहाल गांव ग्यासपुर और अस्पताल परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को टाला जा सके।
पुरानी रंजिश और कानून का खौफ
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण इलाकों में जमीन से जुड़े विवाद किस कदर हिंसक रूप ले लेते हैं। पूर्व विधायक के परिवार से जुड़े होने के कारण इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ना शुरू कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या हमलावरों के मन में कानून का कोई डर नहीं था? दिनदहाड़े इस तरह की वारदात को अंजाम देना अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस की ओर इशारा करता है। मृतक सूफियान का परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है, वहीं पुलिस इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है ताकि असली दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
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