समाज में हम भले ही आधुनिकता का चोला ओढ़ चुके हैं, लेकिन फिरोजाबाद के उत्तर क्षेत्र से सामने आया यह मामला हमारी खोखली मानसिकता को उजागर करता है। एक युवती, जिसने बड़े अरमानों के साथ दो वर्ष पहले मथुरा के एक परिवार में कदम रखा था, उसे क्या पता था कि उसके सपनों का महल ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। शादी के कुछ ही समय बाद जब खुशियों की शहनाइयां शांत हुईं, तो दहेज के दानवों ने अपना असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया। दस लाख रुपये की भारी-भरकम मांग को लेकर उस मासूम को न केवल मानसिक रूप से तोड़ा गया, बल्कि उसे शारीरिक रूप से भी ऐसी यातनाएं दी गईं जिन्हें सुनकर रूह कांप जाए।

शराब के नशे में पति की हैवानियत और दरिंदगी

इस मामले का सबसे वीभत्स पहलू वह है जहाँ पति ने रक्षक के बजाय भक्षक की भूमिका निभाई। पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि उसका पति अक्सर शराब के नशे में धुत होकर घर आता था और उसे भी जबरन शराब पीने के लिए मजबूर करता था। जब वह इसका विरोध करती थी, तो उसके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी। हद तो तब हो गई जब पति ने अपनी ही पत्नी के साथ अप्राकृतिक रूप से संबंध बनाए। यह महज घरेलू हिंसा नहीं, बल्कि एक महिला की गरिमा और उसकी अस्मिता पर गहरा प्रहार है, जिसे समाज और कानून कभी स्वीकार नहीं कर सकता।

बेटी का जन्म बना अभिशाप और घर से बेदखली

दहेज की भूख के साथ-साथ इस परिवार की संकीर्ण सोच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विवाहिता को बेटी होने पर ताने दिए जाते थे। जिस समाज में हम कन्या पूजन की बातें करते हैं, वहां एक मासूम बच्ची के जन्म को प्रताड़ना का आधार बना दिया गया। पीड़िता को अक्सर भूखा-प्यासा रखकर बंद कमरे में प्रताड़ित किया जाता था। मायके पक्ष ने कई बार बीच-बचाव करने की कोशिश की, पंचायतों के दौर चले, मिन्नतें की गईं, लेकिन ससुराल वालों का दिल नहीं पसीजा। अंततः 19 सितंबर को उसे धक्के देकर घर से निकाल दिया गया, जिसके बाद पीड़िता ने इंसाफ की गुहार लगाने का फैसला किया।

कानूनी कार्रवाई और न्याय की उम्मीद

पीड़िता ने पहले मथुरा पुलिस से मदद मांगी थी, लेकिन वहां से निराशा हाथ लगने के बाद उसने फिरोजाबाद पुलिस की शरण ली। इंस्पेक्टर अंजीश कुमार के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए पति, ससुर, सास, जेठ और जेठानी समेत सभी आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब साक्ष्यों को जुटाने और आरोपियों की धरपकड़ में लग गई है। यह मामला एक सबक है उन लोगों के लिए जो कानून से ऊपर खुद को समझते हैं। अब देखना यह होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस इस पीड़िता को कितनी जल्दी न्याय दिला पाती है और इन 'दहेज लोभियों' को उनके किए की सजा कब मिलती है।


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