उत्तर प्रदेश के संभल जिले में कानून का इकबाल बुलंद करने के लिए पुलिस प्रशासन ने दंगाइयों के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है। संभल में भड़की भीषण हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता और शातिर ऑटो लिफ्टर शारिक साटा के खिलाफ एसपी कृष्ण विश्नोई के नेतृत्व में पुलिस अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करने जा रही है। लंबे समय से विदेश में छिपे इस अपराधी को घेरने के लिए पुलिस ने उसकी सवा दो करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही जब्त कर ली थी, लेकिन अब उसके रिहायशी मकान को कुर्क करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यह कार्रवाई उन सभी अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो व्यवस्था को चुनौती देकर फरार चल रहे हैं।

कानूनी नोटिस और पुलिस की अंतिम चेतावनी

एसआईटी ने शारिक साटा के खिलाफ कानूनी घेराबंदी करते हुए दिसंबर माह में उसके नखासा थाना क्षेत्र स्थित आवास पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 84 के तहत नोटिस चस्पा किया था। इस नोटिस के माध्यम से आरोपी को साफ शब्दों में चेतावनी दी गई थी कि यदि वह तीस दिनों के भीतर पुलिस या अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो उसके घर की कुर्की कर ली जाएगी। पुलिस ने इस मुनादी को स्थानीय स्तर पर डुगडुगी पिटवाकर सार्वजनिक भी किया था ताकि समाज में कानून का संदेश स्पष्ट रूप से जाए। नोटिस की अवधि बीत जाने के सत्तर दिन बाद भी जब साटा ने समर्पण नहीं किया, तो अब पुलिस कोर्ट से औपचारिक आदेश प्राप्त कर उसके आशियाने को कुर्क करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।

अपराध का लंबा इतिहास और रेड कॉर्नर नोटिस

शारिक साटा का नाम केवल संभल हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ विभिन्न थानों में साठ से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। वह एक अंतरराष्ट्रीय ऑटो लिफ्टिंग गिरोह का संचालन भी करता रहा है। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह देश छोड़कर फरार हो चुका है, जिसके कारण उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। संभल पुलिस की यह सक्रियता यह दर्शाती है कि अपराधी चाहे सात समंदर पार ही क्यों न बैठा हो, उसकी अवैध रूप से अर्जित संपत्ति और उसके ठिकानों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

संभल हिंसा का काला अध्याय और अदालती सर्वेक्षण

संभल में हिंसा की आग तब भड़की थी जब शाही जामा मस्जिद में अदालत के आदेश पर सर्वेक्षण की प्रक्रिया चल रही थी। यह जांच उस दावे को लेकर थी जिसमें मस्जिद स्थल पर मंदिर के अवशेष होने की बात कही गई थी। चौबीस नवंबर दो हजार चौबीस को हुई इस हिंसक झड़प ने पूरे देश का ध्यान खींचा था, जिसमें पांच लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और दर्जनों सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे। इस मामले में स्थानीय सांसद जिया-उर-रहमान बर्क सहित हजारों लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस की मौजूदा कार्रवाई यह सुनिश्चित करने की दिशा में है कि हिंसा के असली सूत्रधारों को उनके किए की सख्त सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


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