जनपद रामपुर की तहसील बिलासपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम खूंटा खेड़ा स्थित सेंट फ्रांसिस स्कूल इन दिनों चर्चाओं के केंद्र में है। पिछले कुछ समय से स्कूल प्रबंधन और विशेषकर प्रिंसिपल पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करने के जो गंभीर आरोप लगे थे, उस मामले ने अब एक नई करवट ले ली है। इस विवाद के बीच अब स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के परिजनों की एक दूसरी तस्वीर सामने आई है जो पहले लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। बिलासपुर क्षेत्र के इस प्रतिष्ठित संस्थान को लेकर अब अभिभावकों के दो गुट आमने-सामने नजर आ रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में इस प्रकरण को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है।

स्कूल की साख पर साजिश का साया

​स्कूल के समर्थन में उतरे परिजनों का स्पष्ट रूप से मानना है कि यह पूरा विवाद एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। अभिभावकों का तर्क है कि सेंट फ्रांसिस स्कूल अपनी बेहतर शिक्षा और कड़े अनुशासन के लिए पहचाना जाता है, जिसे कुछ लोग निजी स्वार्थ या रंजिश के चलते खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।


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परिजनों ने मीडिया के सम्मुख अपनी बात रखते हुए कहा कि उनके बच्चे कई वर्षों से इसी परिसर में सुरक्षित वातावरण के बीच शिक्षा पा रहे हैं और उन्हें कभी भी प्रिंसिपल या स्टाफ की ओर से किसी भी प्रकार की शिकायत का मौका नहीं मिला। अभिभावकों का दावा है कि बिना किसी ठोस आधार के स्कूल की प्रतिष्ठा को सार्वजनिक रूप से धूमिल करना बेहद निंदनीय कृत्य है।

निष्पक्ष न्याय की पुरजोर मांग

​मामले की गंभीरता को देखते हुए अभिभावकों के बड़े समूह ने रामपुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को संबोधित करते हुए अपनी मांगें रखी हैं। परिजनों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि खूंटा खेड़ा स्कूल में उपजे इस विवाद की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जाए। 

उनका कहना है कि जो आरोप प्रिंसिपल पर मढ़े गए हैं, उनकी सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या संस्थान को बिना वजह मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े। अभिभावकों ने जोर देकर कहा कि प्रशासन को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि इन आरोपों के पीछे वास्तविक मंशा क्या है और कौन लोग पर्दे के पीछे से स्कूल का माहौल बिगाड़ रहे हैं।

बेबुनियाद आरोप-प्रत्यारोप का लगाया आरोप

​बिलासपुर के इस ग्रामीण क्षेत्र में स्थित स्कूल को लेकर अभिभावकों का यह भी कहना है कि अफवाहों और बेबुनियाद आरोप-प्रत्यारोप के कारण बच्चों की मानसिक स्थिति और उनकी पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। परिजनों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अनुशासन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अनुशासन को दुर्व्यवहार का नाम देकर स्कूल को बदनाम करना सरासर गलत है। अभिभावकों के अनुसार, यदि किसी को वास्तव में कोई समस्या है तो उसका समाधान कानूनी और प्रशासनिक तरीके से होना चाहिए, न कि संस्थान के खिलाफ दुष्प्रचार करके। अब सभी की निगाहें रामपुर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई का खुलासा हो सके और खूंटा खेड़ा के इस स्कूल में फिर से सामान्य माहौल बन सके।

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