प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत ने धार्मिक जगत से जुड़े एक संवेदनशील मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह निर्णय उन साक्ष्यों के आधार पर लिया गया है जो बच्चों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की ओर इशारा करते हैं। अदालत के इस आदेश के बाद अब पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे इस प्रकरण में बिना किसी देरी के कानूनी प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाएं।
आरोपों की गंभीरता और आधार
इस प्रकरण की नींव आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा दर्ज कराई गई उस शिकायत पर टिकी है जिसमें आश्रम और गुरुकुल के भीतर बच्चों के शोषण का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार वहां कई अन्य अवैध गतिविधियां भी संचालित की जा रही थीं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 फरवरी 2026 को दो नाबालिग बच्चों के बयान व्यक्तिगत रूप से दर्ज किए थे। इन बयानों के आधार पर न्यायालय ने माना कि आरोपों की निष्पक्ष जांच होना अनिवार्य है।
पुलिस जांच का अगला चरण
अदालत के हालिया आदेश के बाद अब पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू करनी होगी। जांच एजेंसी को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वे पूरी पारदर्शिता के साथ साक्ष्य जुटाएं ताकि न्यायालय में एक मजबूत आरोप पत्र दाखिल किया जा सके। आगामी दिनों में पुलिस की टीमें संबंधित स्थानों का निरीक्षण कर सकती हैं और आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। यह मामला वर्तमान में पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
---समाप्त---