उत्तर प्रदेश के रामपुर जनपद में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के भीषण प्रकोप ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार आ रही गिरावट और सुबह के समय दृश्यता शून्य के करीब पहुँचने के कारण आम जनता के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। मौसम के इन बिगड़े मिजाज और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए जिला प्रशासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने गुरुवार की देर रात जिले के कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। प्रशासन का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा। जिससे हजारों स्कूली बच्चों को सुबह की जानलेवा ठंड से बड़ी राहत मिली है।
देर रात जारी हुआ प्रशासन का आधिकारिक आदेश
रामपुर के जिलाधिकारी ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला गुरुवार रात लगभग 8:30 बजे के करीब लिया। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा की ताकि सूचना समय रहते अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन तक पहुँच सके। अक्सर देखा जाता है कि सुबह के समय सूचना मिलने पर बच्चों को स्कूल के लिए निकलने में परेशानी होती है, इसी दुविधा को दूर करने के लिए प्रशासन ने रात में ही स्थिति स्पष्ट कर दी। इस आदेश के अनुसार शुक्रवार को जिले के सभी प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल पूरी तरह बंद रहेंगे। जिलाधिकारी ने अपने संदेश में स्पष्ट तौर पर कहा है कि वर्तमान मौसम की स्थिति छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है और घने कोहरे के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
केवल विद्यार्थियों को मिली राहत, स्टाफ के लिए नियम अलग
प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों में फिलहाल कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को ही स्कूल आने से छूट प्रदान की गई है। यह अवकाश मुख्य रूप से उन छोटे बच्चों के लिए है जिन्हें सुबह जल्दी घर से निकलना पड़ता है और जो ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। हालांकि, शिक्षकों और विद्यालय के अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति के संबंध में स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आमतौर पर ऐसे मामलों में विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग अपने स्तर से अलग दिशा-निर्देश जारी करता है कि स्टाफ को प्रशासनिक कार्यों हेतु उपस्थित रहना है या नहीं। इस निर्णय का प्राथमिक उद्देश्य केवल छात्रों को सुबह की ठिठुरन भरी हवाओं और कोहरे के जोखिम से सुरक्षित रखना है।
खराब मौसम और कोहरे के कारण बढ़ी चुनौतियां
रामपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से कड़ाके की ठंड ने दस्तक दी है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण दिन के तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। सुबह के समय छाये रहने वाले घने कोहरे ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। सड़कों पर दृश्यता कम होने की वजह से वाहनों की रफ्तार थम गई है और सुबह के समय स्कूली बसों व अन्य वाहनों का आवागमन काफी जोखिम भरा हो गया था। कोहरे के साथ-साथ गिरते पारे ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी बढ़ा दिया है, जिससे बच्चों में सर्दी-जुकाम और अन्य बीमारियों का खतरा पैदा हो गया था।
अभिभावकों की मांग पर प्रशासन की मुहर
मौसम विभाग की चेतावनियों और लगातार गिरते तापमान के बीच अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से अभिभावकों द्वारा लगातार स्कूलों में अवकाश की मांग की जा रही थी। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए और जमीनी हकीकत को देखते हुए जिलाधिकारी ने यह राहत भरा फैसला लिया। इस निर्णय से न केवल बच्चों को राहत मिली है, बल्कि उन अभिभावकों ने भी सुकून की सांस ली है जिन्हें कड़ाके की ठंड में अपने नौनिहालों को स्कूल भेजने की चिंता सता रही थी। फिलहाल प्रशासन मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आगामी दिनों में मौसम के व्यवहार को देखते हुए आगे के फैसले लिए जाएंगे।
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