अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में उस समय हड़कंप मच गया जब अज्ञात हमलावरों ने सुन्नी धर्मशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राव दानिश की गोली मारकर हत्या कर दी। यह सनसनीखेज वारदात विश्वविद्यालय के प्रबंधन विभाग के पास घटित हुई जहां डॉ. दानिश अपनी मोटरसाइकिल से गुजर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावर पहले से ही घात लगाकर बैठे थे और जैसे ही प्रोफेसर उनके करीब पहुंचे उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी गईं। अचानक हुई इस गोलीबारी से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और हमलावर वारदात को अंजाम देकर बड़ी आसानी से फरार होने में सफल रहे। आसपास मौजूद लोग तुरंत डॉ. दानिश को गंभीर हालत में लेकर जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पहुंचे लेकिन अत्यधिक खून बह जाने और शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों में गोली लगने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिसर के भीतर हुई इस दुस्साहसिक वारदात ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉ. राव दानिश को उनके मृदुभाषी स्वभाव और शैक्षणिक योग्यता के लिए जाना जाता था और उनकी अचानक हुई मौत से शिक्षक समुदाय और छात्रों में गहरा रोष व्याप्त है। घटना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र मेडिकल कॉलेज पहुंचे जहां माहौल काफी गमगीन और तनावपूर्ण बना हुआ है। पुलिस प्रशासन ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कैंपस के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है।
स्थानीय पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश कर रहा है और घटना के पीछे के असल कारणों को खंगालने में जुटा है। शुरुआती जांच में पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों के भागने के रास्ते और उनकी पहचान के बारे में कोई पुख्ता सुराग मिल सके। हालांकि अभी तक हत्या के पीछे की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है लेकिन पुलिस व्यक्तिगत रंजिश और अन्य विवादों के कोण से भी मामले की जांच कर रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित कर दी गई हैं और जल्द ही इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर परिसर में बाहरी तत्वों के प्रवेश और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
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