रामपुर जनपद में रविवार की देर रात पुलिस प्रशासन के भीतर एक बड़ी हलचल देखने को मिली जब पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्र ने अचानक स्थानांतरण सूची जारी कर दी। इस सूची के आने के बाद से ही जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। पुलिस अधीक्षक ने स्वार, नगर और सिविल लाइंस जैसी महत्वपूर्ण कोतवाली के प्रभारियों को इधर से उधर कर नई नियुक्तियां की हैं। इस निर्णय को लेकर विभाग के भीतर भले ही इसे एक सामान्य प्रक्रिया बताया जा रहा हो लेकिन जिले के वर्तमान हालातों को देखते हुए इसके गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। सोमवार की सुबह होते ही नए तैनात अधिकारियों ने अपने-अपने थानों में पहुंचकर जिम्मेदारी संभाल ली है।
हत्याकांड और विरोध प्रदर्शन
इस पूरे फेरबदल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी फारुख अधिवक्ता हत्याकांड से जुड़ी हुई मानी जा रही है। पिछले कुछ दिनों से इस हत्याकांड को लेकर अधिवक्ताओं में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त था। बार एसोसिएशन ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सिविल लाइंस प्रभारी को पद से हटाने की जिद पकड़ ली थी। अधिवक्ताओं के एक दिवसीय धरने और प्रदर्शन के दौरान भी यह मांग पूरी प्रखरता के साथ उठाई गई थी। हालांकि उस वक्त प्रशासन ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी लेकिन रविवार रात का यह फैसला सीधे तौर पर उस विरोध का परिणाम माना जा रहा है। जनता और कानूनी समुदाय के बीच बढ़ते अविश्वास को कम करने के लिए प्रशासन ने चेहरे बदलना ही बेहतर समझा।
थानों में नई तैनाती
नए आदेशों के अनुपालन में सिविल लाइंस थाने में सोमवार सुबह एक नया दृश्य देखने को मिला। निर्वतमान प्रभारी संजीव कुमार को थाने से विदाई दी गई और उनकी जगह ओंकार सिंह ने नए प्रभारी के रूप में अपनी आमद दर्ज कराई। थाने में नए प्रभारी का स्वागत पुलिसकर्मियों द्वारा किया गया जिसके तुरंत बाद उन्होंने कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी। स्वार और नगर कोतवाली में भी नए नेतृत्व के आने से कार्यशैली में बदलाव की उम्मीद की जा रही है। स्थानीय स्तर पर लोग इसे पुलिस प्रशासन की छवि सुधारने की कवायद के रूप में देख रहे हैं क्योंकि संवेदनशील मामलों में ढिलाई बरतने के आरोपों से विभाग की साख पर सवाल खड़े हो रहे थे।
गर्म है चर्चाओं का बाजार
अचानक हुए इस बदलाव ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पुलिस प्रशासन जनता की भावनाओं और कानून-व्यवस्था के प्रति गंभीर है। नए प्रभारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती फारुख हत्याकांड से उपजे तनाव को शांत करना और शहर में शांति व्यवस्था को सुदृढ़ करना होगा। जानकारों का मानना है कि यदि यह तबादले नहीं किए जाते तो बार एसोसिएशन अपना आंदोलन और तेज कर सकता था जिससे प्रशासनिक कार्य बाधित होने की संभावना थी। अब देखना यह होगा कि नए अधिकारियों की तैनाती के बाद जिले के अपराध ग्राफ और पुलिस-पब्लिक समन्वय में कितना सुधार आता है। फिलहाल इस निर्णय ने विरोध कर रहे गुटों को कुछ हद तक शांत जरूर कर दिया है।
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