जनपद रामपुर की बिलासपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले भोट थाना क्षेत्र के खूंटाखेड़ा गांव में सोमवार को स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब एक निजी स्कूल के प्रधानाचार्य की संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा हुआ। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों को जैसे ही पता चला कि उनके मासूम बच्चों के साथ स्कूल परिसर में अभद्रता की जा रही है, वे भारी संख्या में स्कूल पहुंच गए। देखते ही देखते स्कूल परिसर हंगामे के अखाड़े में तब्दील हो गया और लोगों ने आरोपी प्रधानाचार्य के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर मौजूद ग्राम प्रधान प्रतिनिधियों ने भी इस कृत्य को समाज के लिए कलंक बताते हुए पुलिस प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

मासूमों की आपबीती और गंभीर आरोप

अभिभावकों ने पुलिस को दी गई शिकायत में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। परिजनों का आरोप है कि प्रधानाचार्य लंबे समय से स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के साथ अश्लील हरकतें कर रहे थे और उनके निजी अंगों को गलत तरीके से स्पर्श करते थे। बच्चों ने जब घर जाकर अपनी पीड़ा सुनाई, तब जाकर इस घिनौनी करतूत का पर्दाफाश हुआ। ग्रामीणों का दावा है कि आरोपी पहले भी इस तरह की हरकतों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुका है, जिसके चलते कई सजग अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला स्कूल से कटवा लिया था। इसके बावजूद प्रधानाचार्य की आदतों में कोई सुधार नहीं हुआ और वह मासूमों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता रहा।

पुलिस की सक्रियता और विधिक जांच

मामले की गंभीरता को भांपते हुए भोट थानाध्यक्ष अर्जुन सिंह त्यागी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उग्र भीड़ को समझा-बुझाकर शांत किया। पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों को थाने ले जाकर उनके बयान दर्ज किए हैं। थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और मामले की तह तक जाने के लिए स्कूल में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को कब्जे में लिया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों और लिखित तहरीर के आधार पर आरोपी के विरुद्ध कड़ी कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

प्रिंसिपल की सफाई और ग्रामीणों की मांग

दूसरी तरफ आरोपी प्रधानाचार्य ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उनका तर्क है कि उनके विरुद्ध साजिश रची जा रही है और उन्होंने कभी भी किसी छात्र के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। हालांकि खूंटाखेड़ा और मुल्लाखेड़ा के ग्राम प्रधान प्रतिनिधियों ने पुलिस को चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगे। फिलहाल पुलिस ने अभिभावकों को आश्वासन दिया है कि जांच की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है।


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