उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सामाजिक ताने-बाने और आपसी रिश्तों के प्रबंधन पर नई बहस छेड़ दी है। मामला अजीमनगर थाना क्षेत्र के नगलिया आकिल गांव का है, जहां एक व्यक्ति की दो पत्नियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई इस कदर बढ़ी कि इसे सुलझाने के लिए गांव के बुजुर्गों और प्रबुद्ध जनों को पंचायत बुलानी पड़ी। दरअसल, यह विवाद किसी संपत्ति या धन-दौलत को लेकर नहीं, बल्कि पति के साथ समय बिताने के अधिकार को लेकर था। घर के भीतर शुरू हुआ यह गृहक्लेश जब गांव की गलियों से होता हुआ थाने तक पहुंचा, तो पुलिस और स्थानीय प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सामाजिक स्तर पर समझौते की राह तलाशी गई।
अरेंज और लव मैरिज के बीच उलझा वैवाहिक जीवन
इस विवाद की जड़ें युवक के दो विवाहों से जुड़ी हैं। युवक ने पहली शादी परिवार की मर्जी से की थी, जबकि दूसरी शादी प्रेम विवाह थी। शुरुआती दिनों के बाद दोनों पत्नियों के बीच तालमेल की कमी साफ नजर आने लगी। अरेंज मैरिज वाली पत्नी और लव मैरिज वाली पत्नी, दोनों ही पति पर अपना पूरा हक जताती थीं। आलम यह था कि पति किसके साथ कितना समय बिताएगा, इसे लेकर आए दिन घर में हंगामा होता रहता था। इस मानसिक खींचतान से परेशान होकर पति भी असहाय महसूस कर रहा था। विवाद इतना गहरा गया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव के सम्मानित लोगों ने पंचायत के माध्यम से बीच का रास्ता निकालने का निर्णय लिया।
पंचायत ने सुनाया साप्ताहिक रोस्टर का फरमान
पंचायत में घंटों चली चर्चा और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पंचों ने एक लिखित समझौता तैयार किया। इस अनोखे समझौते के तहत पति के सात दिनों का विधिवत बंटवारा कर दिया गया। तय किया गया कि सप्ताह के शुरुआती तीन दिन यानी सोमवार, मंगलवार और बुधवार पति अपनी पहली पत्नी के घर पर बिताएगा। इसके बाद अगले तीन दिन गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार का समय दूसरी पत्नी के लिए आरक्षित किया गया। इस फैसले की सबसे रोचक कड़ी रविवार का दिन रहा। पंचायत ने निर्देश दिया कि रविवार को पति किसी भी पत्नी के साथ नहीं रहेगा, बल्कि वह एकांत में अपना समय व्यतीत करेगा ताकि वह मानसिक शांति पा सके।
विशेष परिस्थितियों के लिए लचीले नियम और चर्चा
पंचायत ने इस नियम को पूरी तरह पत्थर की लकीर नहीं बनाया है। मानवीय संवेदनाओं और आपातकालीन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए समझौते में यह प्रावधान भी जोड़ा गया है कि विशेष परिस्थितियों में इस 'टाइम-टेबल' में एक दिन का फेरबदल किया जा सकता है। इस पूरे समझौते पर पति और दोनों पत्नियों के बाकायदा हस्ताक्षर कराए गए हैं ताकि भविष्य में कोई मुकर न सके। वर्तमान में रामपुर के नगलिया आकिल गांव का यह समझौता पूरे क्षेत्र में कौतूहल और चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस पर अपनी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, लेकिन फिलहाल इस व्यवस्था से घर के भीतर चल रहे युद्ध पर विराम लगता दिखाई दे रहा है।
---समाप्त---