राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच मंगलवार देर शाम पुलिस ने बड़ा कदम उठाया। आकाशवाणी भवन परिसर में जमे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को दिल्ली पुलिस ने कई सांसदों के साथ हिरासत में ले लिया। पुलिस शाम से ही लाउडस्पीकर पर घोषणा कर नेताओं से परिसर खाली करने का अनुरोध कर रही थी, लेकिन नेता अपनी मांगों को लेकर वहीं डटे रहे। इसके बाद पुलिस ने सभी को जबरन अपनी गाड़ियों में बैठाया और हिरासत में लेकर सीधे किंग्सवे कैंप ले गई।

​वैन से बाहर दिखे राहुल गांधी

​हिरासत में लिए जाने के दौरान का नजारा काफी हंगामेदार रहा। जैसे ही पुलिस की बस रवाना होने लगी, राहुल गांधी खिड़की से बाहर आधा लटकते हुए अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते नजर आए। वह खिड़की से बाहर निकलने की कोशिश करते भी दिखे, जिसे देखकर कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी शुरू कर दी और पुलिस वैन को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, सुरक्षाबलों ने हालात को काबू में करते हुए गाड़ियों को आगे बढ़ा दिया और सभी नेताओं को सुरक्षित हिरासत स्थल पर पहुंचा दिया।

​चुनाव आयोग की आधिकारिक चिट्ठी

​इस हंगामे के बीच चुनाव आयोग ने एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखी है। आयोग ने साफ किया कि दिन में मार्च के वक्त किसी भी दल की तरफ से मिलने का कोई औपचारिक समय नहीं मांगा गया था। शाम करीब चार बजे दिल्ली पुलिस के जरिए आयोग को पता चला कि राहुल गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मिलना चाहता है। इसके बाद जब बातचीत आगे बढ़ी, तो पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह बैठक संसद भवन एनेक्सी में 240 सांसदों के साथ मांगी जा रही है।

​आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रोटोकॉल के मुताबिक राजनीतिक दलों के साथ बैठकें हमेशा चुनाव आयोग के परिसर में ही होती हैं, इसलिए बाहर बैठक की मांग असामान्य थी और उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता था। आयोग का कहना है कि उसने ज्ञापन लेने के लिए अपने सबसे वरिष्ठ अधिकारी को भेजने का भी प्रस्ताव दिया था, मगर सांसदों ने उसे भी मानने से इनकार कर दिया।


Advertisement

---समाप्त---