देश की राजधानी दिल्ली में आज सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया। चुनाव आयोग की नई मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों और केंद्र सरकार के बीच टकराव अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो चुका है। विपक्षी दलों का सीधा और गंभीर आरोप है कि इस नई व्यवस्था की आड़ में सुनियोजित तरीके से लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम काटकर 'वोटों की खुली डकैती' की जा रही है। इसी के विरोध में आज सुबह विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के दर्जनों सांसद और शीर्ष नेता संसद भवन के ऐतिहासिक मकर द्वार पर एकत्र हुए और वहां से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) की ओर पैदल मार्च शुरू किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में "लोकतंत्र बचाओ", "मतदाता अधिकार वापस दो" और "ईसीआई की मनमानी बंद करो" लिखी तख्तियां थीं, साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार गूंजते नारों ने पूरे लुटियंस जोन का माहौल गरमा दिया।

​सड़कों पर विपक्षी एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन

​इस विशाल मार्च के दौरान विपक्ष की अप्रत्याशित एकजुटता देखने को मिली। मार्च का नेतृत्व कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा कर रहे थे। उनके साथ समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ'ब्रायन व कल्याण बनर्जी, शरद पवार की एनसीपी, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के मनोज झा और शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत समेत कई दिग्गज नेता पहली कतार में कंधे से कंधा मिलाकर चलते नजर आए।

​जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) तथा वामपंथी दलों (सीपीआई, सीपीएम) के सांसदों ने भी इस मार्च में पूरी ताकत झोंकी। राहुल गांधी ने मार्च के दौरान मीडिया से बात करते हुए दो टूक कहा, "यह केवल कुछ राजनीतिक दलों के अस्तित्व की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश के संविधान और आम नागरिक के सबसे बड़े संवैधानिक अधिकार—वोट—को बचाने की निर्णायक जंग है। अगर चुनाव आयोग ही पक्षपात करने लगे, तो देश में निष्पक्ष चुनाव की कल्पना ही बेमानी हो जाती है।" वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग अब स्वायत्त संस्था न रहकर सरकार की कठपुतली बन चुका है और मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।


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​छावनी में तब्दील हुई दिल्ली: भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग

​संसद मार्ग से अशोका रोड और जनपथ की ओर जाने वाले तमाम प्रमुख रास्तों को दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पहले ही सील कर दिया था। मार्च को चुनाव आयोग के दफ्तर तक पहुंचने से रोकने के लिए कई स्तरों पर लोहे के ऊंचे बैरिकेड्स लगाए गए थे। जैसे ही विपक्षी सांसदों का हुजूम संसद मार्ग के गोलचक्कर के करीब पहुंचा, सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान सांसदों और पुलिस कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। जिसके बाद सभी संसद धरने पर बैठ गए। सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन और अतिरिक्त रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टुकड़ियों को तैनात कर रखा था। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य दिल्ली के कई मुख्य मार्गों पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे आम जनता को भी जाम का सामना करना पड़ा।

​चुनाव आयोग से 400 मीटर पहले बैरिकेडिंग, सड़क पर धरने पर बैठे सांसद

​संसद मार्ग से अशोका रोड की ओर बढ़ रहे इस विशाल मार्च को चुनाव आयोग के दफ्तर से करीब 400 मीटर पहले ही दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। आगे बढ़ने की अनुमति न मिलने पर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। सांसदों ने जब बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों के साथ तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।

​रास्ता रोके जाने के विरोध में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत सभी विपक्षी सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। सांसदों ने सड़क पर बैठकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे पूरा इलाका पूरी तरह जाम हो गया।

​राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत कई बड़े नेता हिरासत में लिए गए

​सड़क पर लंबा जाम लगने और सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। पुलिस ने धरना दे रहे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों के प्रमुख नेताओं समेत दर्जनों सांसदों को जबरन हिरासत में (डिटेन) ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं को पुलिस बसों में बैठाकर नजदीकी पुलिस थानों और अस्थाई शिविरों की ओर ले जाया गया। हिरासत में लिए जाते समय नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष की आवाज को कुचलने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है।

​संसद से राज्यों तक: 'वोट बचाओ-देश बचाओ' आंदोलन का राष्ट्रव्यापी विस्तार

​इंडिया गठबंधन के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यह विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली के कुछ घंटों के मार्च तक सीमित रहने वाला नहीं है। विपक्षी दलों ने 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती से शुरू किए गए 'वोट बचाओ-देश बचाओ' आंदोलन को 8 अक्टूबर तक देशव्यापी स्तर पर ले जाने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की है।

​दिल्ली के अलावा मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, बेंगलुरु और पटना जैसे प्रमुख महानगरों तथा राज्यों की राजधानियों में भी पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा चुनाव आयोग के क्षेत्रीय कार्यालयों का घेराव किया जा रहा है। विपक्षी मोर्चे का सीधा अल्टीमेटम है कि जब तक चुनाव आयोग मतदाता सूची के नए विवादास्पद नियमों को वापस नहीं लेता, एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र न्यायिक जांच नहीं करवाता और मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह जनांदोलन संसद के भीतर और देश की सड़कों पर लगातार जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यह टकराव देश की राजनीति को और अधिक गरमाने के साफ संकेत दे रहा है।

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