लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा संसद में परिसीमन विधेयक पारित कराने के प्रयासों पर तीखा हमला बोला है। तमिलनाडु के मामल्लापुरम के निकट मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का यह कदम तमिल लोगों के राजनीतिक अधिकारों को छीनने की एक बड़ी साजिश है। उन्होंने राज्य की सभी क्षेत्रीय तमिल पार्टियों और राष्ट्रीय दलों से एकजुट होकर संसद में इस विधेयक को विफल करने का आह्वान किया। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि जो भी दल या नेता इस विधेयक का समर्थन करेगा, उसे तमिलनाडु की जनता कभी माफ नहीं करेगी और इतिहास उन्हें 21वीं सदी के 'एट्टप्पन' के रूप में याद रखेगा, जिनका नाम तमिल इतिहास में विश्वासघात का प्रतीक माना जाता है।
राहुल गांधी तमिलनाडु में पार्टी के सांगठनिक पुनर्गठन के तहत आयोजित जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में भाग लेने पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने पार्टी के भीतर गुटबाजी को विकास में सबसे बड़ा बाधक बताया। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो पदाधिकारी सबको साथ लेकर नहीं चलेंगे और जमीनी स्तर पर संगठन के लिए मेहनत नहीं करेंगे, उनके लिए पार्टी में कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने तमिलनाडु के भविष्य और स्वाभिमान की रक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर परिसीमन के खिलाफ लड़ाई लड़ने की अपील की।
इस दौरे के दौरान राहुल गांधी ने नीट परीक्षा की तैयारी के दौरान आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एक टूटी हुई और पारदर्शीहीन शिक्षा व्यवस्था के कारण देश के होनहार युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। प्रश्नपत्र लीक होने, परीक्षाएं अचानक रद्द होने और सालों की मेहनत रातों-रात पानी में मिल जाने से लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों का भरोसा डगमगा गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि माता-पिता के आंसुओं और उनके विलाप से बड़ा कोई दुख नहीं हो सकता, और यह स्थिति वर्तमान शिक्षा प्रणाली की विफलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री छात्रों को माफ करने जैसी बातें करते हैं, जबकि उन्हें खुद पीड़ित परिवारों से मिलकर अपनी व्यवस्थागत नाकामियों के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने कभी उन परिवारों का दर्द समझने की कोशिश नहीं की जिनकी जिंदगी भर की जमा-पूंजी और सपने पेपर लीक की भेंट चढ़ गए। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि देश के युवाओं को किसी की माफी की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें एक पारदर्शी, सुरक्षित और न्यायपूर्ण शिक्षा प्रणाली की दरकार है।
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