उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में जनसभा के संबोधन के बाद मंच का 'शुद्धिकरण' किए जाने की घटना पर सियासी संग्राम और तेज हो गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे न केवल एक राष्ट्रीय नेता का अपमान बताया है, बल्कि इसे देश के पूरे दलित समाज, सामाजिक सौहार्द और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला करार दिया है। पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़ी विचारधारा को कटघरे में खड़ा किया है।

​कांग्रेस नेतृत्व ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सार्वजनिक भाषण के मंच का शुद्धिकरण करना भाजपा और आरएसएस की संकीर्ण मानसिकता का प्रत्यक्ष प्रदर्शन है। पार्टी की ओर से मांग की गई है कि इस कृत्य का खंडन होना चाहिए और देश के सामने सच्चाई आनी चाहिए। प्रदेश प्रभारी और वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि रैली की सफलता से बौखलाए लोगों ने शुद्धिकरण के नाम पर ओछी मानसिकता दिखाई है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि घटना के बाद भी आरोपियों पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

​उत्तराखंड कांग्रेस के प्रांतीय नेतृत्व ने कहा कि भाषण के बाद मंच को अशुद्ध मानकर हवन-पूजन करना बेहद आहत करने वाला और निंदनीय है। पार्टी ने नैनीताल के पुलिस प्रशासन से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के पार्टी पदाधिकारियों ने भी इसे पूरे दलित समाज का अमानवीय अपमान करार देते हुए देशव्यापी माफी की मांग उठाई है।

​कांग्रेस नेताओं का सामूहिक रूप से मानना है कि यह घटना केवल एक राजनीतिक मंच का मामला नहीं है, बल्कि उस सोच का प्रतीक है जो आज भी समाज को जातिगत भेदभाव के चश्मे से देखती है। पार्टी ने सार्वजनिक रूप से पूछा कि जो लोग बाबा साहेब के संविधान की शपथ लेते हैं, क्या वे वाकई बराबरी में विश्वास रखते हैं या पुरानी जातिवादी प्रथाओं को बढ़ावा देना चाहते हैं? कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि आधुनिक लोकतांत्रिक भारत में ऐसी ओछी सोच का हर स्तर पर पुरजोर विरोध जारी रहेगा।


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उधर, बीजेपी ने भी इस विवाद से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने साफ कहा कि शुद्धीकरण यज्ञ में बीजेपी का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं था और पार्टी का इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे में अब हल्द्वानी का रामलीला मैदान राजनीतिक अखाड़ा बन गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे दलित और पिछड़ा विरोधी मानसिकता का मामला बताकर बीजेपी को घेर रही है, तो दूसरी तरफ हिंदूवादी संगठन इसे सनातन के सम्मान से जोड़ रहा है। बीजेपी कह रही है कि आयोजन से उसका कोई संबंध नहीं।

संसद में जेपी नड्डा ने कहा,  "बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। मैं आपकी भावना का समर्थन करता हूं, हमारे लिए भी यह दुखद है।

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