एक तरफ जहाँ पूरा प्रयागराज संगम की रेती पर माघ मेले के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था में डूबा हुआ है, वहीं शहर के बीचों-बीच कीडगंज जैसे रिहायशी इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सभ्यता और कानून को शर्मसार कर दिया है। लाखों श्रद्धालु जहाँ मोक्ष की कामना लेकर पतित पावनी गंगा में डुबकी लगा रहे हैं, वहीं चंद दूरी पर एक किराए के मकान के बंद दरवाजों के पीछे देह व्यापार की गंदी स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी। पुलिस ने जब रविवार को इस ठिकाने पर धावा बोला, तो अंदर का नजारा देखकर खुद खाकी वर्दी वाले भी दंग रह गए।

किराए के कमरे और जिस्म का सौदा

यह पूरा मामला तब खुला जब स्थानीय नागरिकों का सब्र जवाब दे गया। मोहल्ले के लोगों को काफी समय से इस मकान में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर शक था। रविवार दोपहर जब लोगों ने कीडगंज थाना प्रभारी को सूचना दी, तो पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए मौके की घेराबंदी कर ली। पुलिस के बार-बार दस्तक देने के बाद भी जब अंदर से कुंडी नहीं खुली, तो अधिकारियों ने दरवाजा तोड़ने का कड़ा फैसला लिया। कमरों के भीतर कदम रखते ही पुलिस की आंखों के सामने अपराध और अनैतिकता की परतें खुल गईं। अलग-अलग कमरों में चार महिलाएं और पांच पुरुष बेहद आपत्तिजनक अवस्था में पाए गए। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है, जो इस बात की तस्दीक करती है कि यहाँ लंबे समय से पेशेवर तरीके से अनैतिक कार्य संचालित हो रहा था।

प्रशासनिक रसूख की आड़ में काला धंधा 


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जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ, वह यह कि यह मकान एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वंदना त्रिपाठी के नाम पर है। मकान को सर्वेश नाम के एक व्यक्ति ने यह कहकर किराए पर लिया था कि वह अपने परिवार के साथ रहेगा। लेकिन उसने कानून और भरोसे की धज्जियां उड़ाते हुए अपने परिवार को कहीं और शिफ्ट कर दिया और इस सरकारी रसूख वाले ठिकाने को 'अय्याशी के अड्डे' में तब्दील कर दिया। पकड़े गए पुरुषों में सभी स्थानीय प्रयागराज के ही निवासी हैं, जबकि महिलाओं के तार पश्चिम बंगाल और वाराणसी जैसे शहरों से जुड़े हुए हैं। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह धंधा पिछले तीन महीनों से बेखौफ होकर चलाया जा रहा था।

समाज के रक्षकों की सजगता से हुआ खुलासा 

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह जागरूक समाज की नजरों से नहीं बच सकता। कीडगंज के स्थानीय निवासियों ने न केवल इस अवैध गतिविधि को भांप लिया, बल्कि पुलिस को सटीक सूचना देकर इस गिरोह का अंत सुनिश्चित किया। फिलहाल पुलिस ने रैकेट संचालक समेत सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है और मकान मालिक आईएएस अधिकारी के कानूनी प्रतिनिधियों से भी संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किरायेदारी की प्रक्रिया में क्या खामियां रहीं।

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