उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने कानून व्यवस्था और सामाजिक आक्रोश के बीच की लकीर को धुंधला कर दिया है। सराय इनायत थाना क्षेत्र के एक गांव में जब एक दरिंदे ने मर्यादा की सीमा लांघने की कोशिश की तो जनता का धैर्य जवाब दे गया। यह मामला महज एक अपराध की कहानी नहीं है बल्कि उस सुलगते गुस्से का प्रकटीकरण है जो अक्सर लचर कानूनी प्रक्रियाओं के डर से उपजा है। घटना उस वक्त की है जब आरोपी ने एक घर में घुसकर महिला के साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। महिला की चीख पुकार सुनकर पहुंचे परिजनों और ग्रामीणों ने आरोपी को भागने का मौका नहीं दिया और उसे घेराबंदी कर दबोच लिया। इसके बाद जो हुआ वह रूह कंपा देने वाला और कानून को चुनौती देने वाला दृश्य था।
सरेराह बेइज्जती और इंसाफ का खूनी मंजर
भीड़ का गुस्सा इस कदर चरम पर था कि उन्होंने आरोपी को पुलिस के हवाले करने के बजाय खुद ही सजा देने का फैसला किया। गुस्साए लोगों ने पहले आरोपी के कपड़े फाड़ दिए और फिर उसे लात-घूसों और डंडों से इस कदर पीटा कि वह बेसुध हो गया। चश्मदीदों के मुताबिक भीड़ के सिर पर खून सवार था और वे आरोपी को उसके किए की सजा तुरंत देना चाहते थे। तमाशबीन बनी भीड़ और आक्रोशित परिजनों ने आरोपी को सड़क पर लिटाकर लंबी दूरी तक घसीटा। यह दृश्य किसी भी सभ्य समाज के लिए विचलित करने वाला हो सकता है लेकिन वहां मौजूद लोगों के लिए यह उस हैवानियत का जवाब था जो महिला के साथ करने की कोशिश की गई थी।
वर्दी के पहुंचने तक मरणशन्न हुआ आरोपी
घंटों चले इस तांडव के बाद जब पुलिस को सूचना मिली तो हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने बड़ी मुश्किल से आरोपी को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया। तब तक आरोपी की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि वह खड़ा होने की स्थिति में भी नहीं था। पुलिस ने उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जहाँ उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है लेकिन कानून को हाथ में लेने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह लोग कानून के रक्षक बनने की कोशिश में खुद कानून तोड़ रहे थे।
सामाजिक न्याय बनाम कानूनी प्रक्रिया
यह घटना फिर से एक बड़ी बहस को जन्म देती है कि क्या जनता का कानून पर से विश्वास उठ चुका है। प्रयागराज की सड़कों पर जो हुआ वह एक अपराधी के प्रति घृणा तो दिखाता ही है साथ ही यह भी बताता है कि लोग अब अदालती कार्यवाही के लंबे इंतजार के बजाय मौके पर फैसले को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि पुलिस का तर्क है कि इस तरह की हिंसा किसी भी सूरत में जायज नहीं है क्योंकि इससे निर्दोष के फंसने या भीड़ के अनियंत्रित होने का खतरा रहता है। फिलहाल पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।
---समाप्त---