देवरिया जेल में बंद पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की तबीयत मंगलवार देर रात अचानक बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जहाँ डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई है। बताया जा रहा है कि जमानत याचिका खारिज होने के बाद वे तनाव में थे और कई दिनों से उनकी दवाएं भी छूटी हुई थीं।
जमानत खारिज होने के चंद घंटों बाद बिगड़ी तबीयत
देवरिया जिला जेल की दीवारों के पीछे बंद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर के लिए मंगलवार की रात भारी संकट लेकर आई। धोखाधड़ी के मामले में न्यायिक हिरासत काट रहे अमिताभ ठाकुर को मंगलवार दोपहर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से बड़ा झटका लगा था, जब उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। जेल सूत्रों का कहना है कि इस फैसले के बाद से ही वह काफी खामोश और परेशान नजर आ रहे थे। दोपहर में पेशी से लौटने के बाद उन्होंने रात का भोजन किया और कुछ लिखने-पढ़ने में व्यस्त हो गए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आधी रात के सन्नाटे को उनकी बेचैनी ने तोड़ दिया और अचानक शुरू हुए सीने के तेज दर्द ने जेल प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए।
आधी रात को अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल
रात लगभग 12 बजे जब पूरा जेल परिसर सो रहा था, तब अमिताभ ठाकुर ने असहनीय दर्द और घबराहट की शिकायत की। जेल के सुरक्षाकर्मियों और डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्हें तत्काल देवरिया मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। हालांकि, वहां उनकी हालत में कोई सुधार नहीं दिखा और डॉक्टरों ने उनकी गिरती सेहत को देखते हुए रात 2 बजे ही उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। एम्बुलेंस के सायरन और सुरक्षा घेरे के बीच उन्हें गोरखपुर लाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनके इलाज में जुट गई है। शुरुआती जांच में उनके दिल की धड़कनों में भारी असंतुलन पाया गया है, जिससे मेडिकल बुलेटिन में हार्ट अटैक की प्रबल आशंका व्यक्त की गई है।
दवाओं की अनदेखी और खराब ईसीजी रिपोर्ट
मेडिकल कॉलेज से छनकर आ रही खबरों ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि अमिताभ ठाकुर पिछले 9 दिनों से हृदय रोग से जुड़ी अपनी नियमित दवाएं नहीं ले रहे थे। दवाओं का यह अंतराल उनके शरीर पर भारी पड़ गया और उनकी ईसीजी रिपोर्ट काफी चिंताजनक आई है। डॉक्टरों का कहना है कि दिल की मांसपेशियों पर दबाव काफी बढ़ गया है, जिसके कारण अब उनकी ईको जांच कराने की तैयारी की जा रही है। उनके रक्त के नमूने भी विस्तृत जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। स्थिति की गंभीरता और उनके हाई-प्रोफाइल बैकग्राउंड को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के किसी हायर सेंटर में स्थानांतरित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
तनाव और न्यायिक लड़ाई के बीच फंसी जान
अमिताभ ठाकुर 10 दिसंबर से ही जेल की काल कोठरी में बंद हैं। एक समय प्रदेश की कानून व्यवस्था को संभालने वाला यह अधिकारी आज खुद कानूनी पेचीदगियों और शारीरिक कष्टों के बीच फंसा हुआ है। मंगलवार का दिन उनके लिए मानसिक रूप से काफी थकाने वाला रहा क्योंकि अदालत से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद थी। कानूनी जानकारों का मानना है कि जमानत याचिका का खारिज होना उनके लिए एक गहरा मानसिक आघात साबित हुआ, जिसने संभवतः उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर सीधा असर डाला। फिलहाल गोरखपुर के आईसीयू वार्ड में वह जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं, जबकि उनके समर्थक और परिजन उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।
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