संगम नगरी प्रयागराज में फर्जी एलएलबी मार्कशीट के सहारे वकालत का लाइसेंस हासिल करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण के उजागर होने के बाद कानूनी गलियारों में हड़कंप मच गया है। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की ओर से मिली शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिछले तीन दिनों के भीतर 39 वकीलों के खिलाफ अलग-अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर ली है।

​सिविल लाइंस थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के सचिव आरके शुक्ला ने कुल 105 ऐसे वकीलों की औपचारिक सूची और शिकायत सौंपी है, जिन पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के दम पर सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) हासिल करने का आरोप है। यह सभी आरोपी वर्तमान में इसी फर्जीवाड़े के आधार पर वकालत कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि बाकी बचे आरोपियों के खिलाफ भी अगले एक से दो दिनों में केस दर्ज कर लिया जाएगा, जिसके बाद पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच शुरू की जाएगी।

​इस फर्जीवाड़े में सहारनपुर निवासी दीपक कश्यप के खिलाफ दर्ज मामले से पूरे फर्जीवाड़े का तरीका सामने आया है। शिकायत के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीते 3 जून को एक अहम आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया था कि जांच के दौरान जिन भी वकीलों की डिग्रियां फर्जी पाई जाएं, उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाए। इसी क्रम में जब दीपक कश्यप द्वारा प्रस्तुत की गई डिग्री की सत्यता जांचने के लिए उसे राजस्थान के पिलानी स्थित श्रीधर यूनिवर्सिटी भेजा गया, तो विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपने आधिकारिक रिकॉर्ड का मिलान कर यह स्पष्ट कर दिया कि जमा की गई मार्कशीट पूरी तरह से फर्जी और कूटरचित है।

​यूनिवर्सिटी से फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने दीपक कश्यप के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रयागराज पुलिस अब इस पूरे 105 वकीलों के नेटवर्क और धोखाधड़ी की शिकायत पर चरणबद्ध तरीके से कानूनी शिकंजा कस रही है। फिलहाल पुलिस का प्राथमिक उद्देश्य सभी नामांकित वकीलों के खिलाफ प्राथमिक दर्ज करने की प्रक्रिया को पूरा करना है, जिसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए विवेचना को आगे बढ़ाया जाएगा।


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