उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक दलित युवक राजेश की पुलिस हिरासत के दौरान हुई मौत ने स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामूली विवाद के सिलसिले में थाने लाए गए युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में जान चले जाने से पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर उंगलियां उठ रही हैं। इस घटना के सामने आने के बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थानीय लोग निष्पक्ष कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
सीसीटीवी फुटेज में युवक को अचानक जमीन पर गिरते और पुलिसकर्मियों द्वारा उसे संभालने का प्रयास करते देखा गया है। इसके बावजूद, परिजनों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने घटना की जानकारी देने में देरी की और मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की। पीड़ित परिवार का कहना है कि हिरासत में युवक के साथ मारपीट की गई है, जिसके चलते उसकी हालत बिगड़ी और सही समय पर चिकित्सीय सहायता नहीं मिल सकी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी भी पुलिसकर्मी की लापरवाही या संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दलित युवक की मौत के बाद मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। निष्पक्ष जांच, दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग जोर पकड़ रही है। फिलहाल, प्रशासनिक टीम स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में मुस्तैद है।
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