धर्मनगरी हरिद्वार के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में अचानक उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक छोटे से कमरे का दरवाजा तोड़ा गया। पंखे से लटकता हुआ एक 53 साल का शख्स खामोश पड़ा था—यह शव किसी साधारण व्यक्ति का नहीं, बल्कि आजाद भारत के सबसे खौफनाक और घिनौने अपराध के मुख्य किरदार सुरेंद्र कोली का था! जो शख्स कभी पूरे देश की रूह कंपा देने वाले आरोपों के केंद्र में था, वह सिडकुल की तंग गलियों में अपनी पहचान छिपाकर चाय बेच रहा था। लेकिन इस खामोश मौत ने 20 साल पुराने उस भयानक अतीत को एक झटके में फिर जिंदा कर दिया है, जिसकी कल्पना मात्र से लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

​घटना वाले दिन जब कोली काफी देर तक अपनी चाय की दुकान पर नहीं पहुंचा, तो आसपास के लोगों को शक हुआ। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। पड़ोसियों ने जब खिड़की से अंदर झांका, तो उनके होश उड़ गए। फौरन पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस फिलहाल हर पहलू से इस संदिग्ध मौत की तफ्तीश में जुटी है, लेकिन इस घटना ने उस वीभत्स दौर की यादें फिर ताजा कर दी हैं जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

​जानें क्या था निठारी कांड!

​देश के सबसे सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाले अपराधों में शुमार निठारी कांड का खुलासा दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के पास हुआ था। इस कोठी का मालिक व्यवसायी मोनिन्दर सिंह पंढेर था, जो भारी निर्माण मशीनों और JCB इक्विपमेंट का कारोबार चलाता था। सुरेंद्र कोली वहां पंढेर के घरेलू नौकर के रूप में काम करता था।


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​निठारी गांव से मासूम बच्चों और महिलाओं के लगातार गायब होने से इलाके में दहशत का माहौल था। जब पुलिस ने स्थानीय लोगों के भारी दबाव में कोठी के पीछे बने नाले की खुदाई शुरू कराई, तो वहां से इंसानी कंकाल, खोपड़ियां और शरीर के टुकड़े मिलने लगे, जिसे देखकर जांच अधिकारियों तक के पांव तले जमीन खिसक गई।

​तफ्तीश आगे बढ़ी तो हैवानियत के ऐसे-ऐसे परतें खुलीं कि पूरा देश सन्न रह गया। सुरेंद्र कोली पर मासूमों का अपहरण करने, उनके साथ दरिंदगी करने, हत्या करने और उनके अंगों को पकाकर खाने (नरभक्षिता) जैसे अत्यंत वीभत्स और अमानवीय आरोप लगे। सीबीआई ने इस मामले में दर्जनों केस दर्ज किए और सालों तक चले लंबे घटनाक्रम के बाद निचली अदालतों ने कोली को फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, न्याय की लंबी और पेचीदा कानूनी लड़ाई के बाद, अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की कमी और जांच की गंभीर कमियों के आधार पर सुरेंद्र कोली और मोनिन्दर सिंह पंढेर को कई मामलों में बरी कर दिया। जेल की सलाखों से बाहर आने के बाद कोली पहचान छिपाकर हरिद्वार में गुमनामी की जिंदगी काट रहा था, लेकिन इस तरह अचानक हुई उसकी मौत ने दो दशक पुराने निठारी कांड का अध्याय एक बार फिर पूरे देश के सामने खोलकर रख दिया है।

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