उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें पाने के लिए एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। NEET UG परीक्षा के जरिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का फायदा उठाकर कम नंबरों वाले छात्रों ने मनचाहे कॉलेजों में दाखिला ले लिया। मामले की भनक लगते ही पुलिस ने देहरादून के रायपुर और क्लेमनटाउन थानों में चार छात्राओं और एक छात्रा की मां के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों ने जिन मकानों के पते दिखाकर राजस्व प्रमाण पत्र बनवाए थे, वे वहां कभी रहते ही नहीं थे। गड़बड़ी पक्की होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने चारों छात्राओं का कॉलेज आवंटन रद्द कर दिया है।

​कम नंबरों पर मिला दाखिला

​काउंसिलिंग के आंकड़ों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जहां सामान्य वर्ग के छात्रों को 600 से ज्यादा अंक लाने पर भी सरकारी कॉलेज के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है, वहीं इस खेल के जरिए 234 से लेकर 400 अंक लाने वालों को भी सरकारी सीटें अलॉट हो गईं। स्वाति और खुशी नाम की छात्राओं को बेहद कम अंकों पर राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर मिल गया। वहीं परी को हल्द्वानी और तृप्ति को हरिद्वार के सरकारी मेडिकल कॉलेज की सीट अलॉट हो गई। महज 27 हजार से 88 हजार तक की ऑल इंडिया रैंक पर फर्जी कागजों के सहारे ये दाखिले पक्के कराए गए थे।

​पटवारियों की भूमिका पर सवाल


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​इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन पटवारियों की शिकायत पर अब पुलिस मुकदमे दर्ज कर रही है, असल में पूर्व में उन्हीं की रिपोर्ट पर ये फर्जी प्रमाण पत्र जारी हुए थे। इससे साफ है कि कागजात जारी करते वक्त मौके पर जाकर कोई पड़ताल नहीं की गई थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि आरोपियों के पते असत्यापित पाए गए हैं और दून पुलिस ने BNS की धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक-नगर प्रमोद कुमार के मुताबिक दोनों थानों के मामलों की संयुक्त पड़ताल के लिए विशेष जांच दल (SIT) बना दिया गया है।

​अन्य श्रेणियों पर भी कड़ाई

​इस धांधली के बाद अब अन्य आरक्षित श्रेणियों के प्रमाण पत्रों की भी जांच शुरू हो गई है। हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने एससी-एसटी कोटे से दाखिला लेने वाले 8 अन्य छात्रों को नोटिस भेजकर तलब किया है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने बताया कि पहली काउंसिलिंग को लेकर कई शिकायतें मिली थीं। अब विवि प्रशासन ने फैसला लिया है कि जिला प्रशासन की ओर से मौके पर जाकर अंतिम सत्यापन पूरा करने के बाद ही किसी भी श्रेणी का आरक्षण मान्य माना जाएगा।

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