न्यूयॉर्क की मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में एक बड़ा नाटकीय मोड़ तब आया जब निखिल गुप्ता ने खुद पर लगे गंभीर आरोपों को स्वीकार कर लिया। 54 वर्षीय निखिल पर सुपारी देकर हत्या कराने की साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे संगीन आरोप थे। मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के समक्ष हुई इस सुनवाई में निखिल ने उन गतिविधियों में अपनी संलिप्तता मानी, जिन्हें लेकर अमेरिकी जांच एजेंसियां लंबे समय से दावे कर रही थीं। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल चेक रिपब्लिक में गिरफ्तारी और फिर अमेरिका प्रत्यर्पण के बाद निखिल लगातार खुद को निर्दोष बता रहे थे। अब इस स्वीकारोक्ति के बाद उनके लिए कानूनी राहें बेहद कठिन हो गई हैं और उन्हें अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी जेल की सलाखों के पीछे बिताना पड़ सकता है।

साजिश की जड़ें और सरकारी रुख

​अमेरिकी अभियोजकों का दावा है कि निखिल गुप्ता केवल एक मोहरा थे और इस पूरी साजिश के तार भारत के एक सरकारी अधिकारी से जुड़े हुए थे। हालांकि, भारत सरकार ने इन दावों को शुरू से ही सिरे से खारिज किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी व्यक्ति की इस तरह से हत्या कराना भारत की आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं है। भारत ने इस मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित की थी ताकि आरोपों की सच्चाई का पता लगाया जा सके। दूसरी ओर, पन्नू जिसे भारत ने आतंकवादी घोषित कर रखा है, पर लगातार भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप है। इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गलियारों में काफी हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर दो लोकतांत्रिक देशों के सुरक्षा और कानून प्रवर्तन सहयोग से जुड़ा है।

कौन है पन्नू और कैसे फंसा निखिल

​गुरपतवंत सिंह पन्नू एक अमेरिकी-कनाडाई नागरिक है जो सिख फॉर जस्टिस नामक प्रतिबंधित संगठन का संचालन करता है। उस पर भारत के खिलाफ अलगाववादी एजेंडा चलाने और हिंसा भड़काने के आरोप लगते रहे हैं। निखिल गुप्ता का नाम पहली बार नवंबर 2023 में दुनिया के सामने आया जब न्यूयॉर्क में पन्नू की हत्या की नाकाम साजिश का खुलासा हुआ। आरोप था कि निखिल ने एक व्यक्ति को हत्या के लिए बड़ी रकम देने का वादा किया था, जो असल में अमेरिकी एजेंसी का अंडरकवर एजेंट निकला। जून 2024 में चेक रिपब्लिक से अमेरिका लाए जाने के बाद से ही निखिल ब्रुकलिन की जेल में बंद हैं। अब जुर्म कबूलने के बाद इस मामले का कानूनी पक्ष लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है, लेकिन इसके राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट होंगे।


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