आधुनिक युग में तकनीक जहां विकास का माध्यम है, वहीं नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में यह सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का घातक हथियार साबित हो रही है। दक्षिणी नेपाल के परसा और धनुषा जिलों में बीते कुछ घंटों में जो कुछ भी हुआ, उसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। रक्सौल सीमा से सटे बीरगंज और आसपास के इलाकों में रविवार को उस समय स्थिति बेकाबू हो गई जब सोशल मीडिया पर प्रसारित एक विवादित वीडियो ने दो समुदायों को आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया। इस घटनाक्रम की शुरुआत धनुषा जिले से हुई, जहां कथित तौर पर हिंदू विरोधी सामग्री साझा करने के बाद आक्रोशित भीड़ ने एक धार्मिक स्थल को निशाना बनाया। इस घटना की प्रतिक्रिया में रविवार को बीरगंज की सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले। प्रदर्शनकारियों ने न केवल टायर जलाकर रास्ता रोका बल्कि कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए पुलिस थानों पर भी हमला बोल दिया।

बीरगंज में पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

बीरगंज में रविवार की सुबह तनावपूर्ण रही। मस्जिद में हुई तोड़फोड़ के विरोध में मुस्लिम समुदाय के प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर अपना रोष प्रकट किया। पुलिस के मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक हो गया। भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया और स्थानीय पुलिस चौकी में तोड़फोड़ की कोशिश की। बेकाबू भीड़ को तितर-बितर करने और शहर में अमन-चैन बहाल करने के लिए स्थानीय पुलिस को आंसू गैस के करीब आधा दर्जन गोले दागने पड़े। इस झड़प में कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे सात पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हालांकि, वर्तमान में प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और भारी संख्या में सशस्त्र बलों की तैनाती की गई है ताकि हिंसा की कोई नई लहर न उठे।

धनुषा जिले में कार्रवाई और गिरफ्तारियों का दौर

हिंसा के केंद्र रहे धनुषा जिले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक तीन मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिया है। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि टिकटॉक जैसे प्लेटफार्मों का इस्तेमाल धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए किया गया था। दो युवकों पर हिंदू विरोधी सामग्री प्रसारित करने का आरोप है, जिसके बाद भड़की हिंसा में कमला नगरपालिका के सखुवा मारन इलाके में मस्जिद को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस अब उन सभी डिजिटल फुटप्रिंट्स की तलाश कर रही है जिन्होंने इस नफरत को फैलाने में ईंधन का काम किया। प्रशासन यह स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह प्रत्यक्ष रूप से हिंसा में शामिल हो या डिजिटल माध्यम से साजिश का हिस्सा रहा हो।

प्रशासन की चेतावनी और सामाजिक सद्भाव की अपील

परसा के मुख्य जिला अधिकारी भोला दाहाल ने वर्तमान संकट को देखते हुए आम जनता से शांति और धैर्य बनाए रखने की अपील की है। जिला प्रशासन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि फेसबुक, टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अफवाहें फैलाने, सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने या राष्ट्रीय एकता के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी असामाजिक तत्व को आपसी भाईचारे के ताने-बाने को तोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। फिलहाल, नेपाल-भारत सीमा के इन इलाकों में सन्नाटा पसरा है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं।


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