एकता का प्रदर्शन
इस विरोध मार्च में MVA के प्रमुख नेता - शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के सुप्रीमो शरद पवार, और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट शामिल हुए। खास बात यह रही कि राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे भी इस प्रदर्शन में शामिल हुई, जो चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ एक साझा मंच को दर्शाता है। यह मोर्चा मुंबई की फैशन स्ट्रीट से शुरू होकर लगभग एक किलोमीटर दूर बीएमसी मुख्यालय पर समाप्त हुआ, जहाँ नेताओं ने एक रैली को संबोधित किया।
मतदाता सूची में विसंगतियों के आरोप
नेताओं ने मतदाता सूची में एकाधिक प्रविष्टियों, गलत ढंग से नाम हटाने और नाम जोड़ने जैसी विसंगतियों को उजागर किया।
* राज ठाकरे ने दावा किया कि मुंबई उत्तर लोकसभा सीट पर 17.29 लाख मतदाताओं में से लगभग 62 हजार मतदाता डुप्लिकेट हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई की अन्य सीटों पर भी बड़ी संख्या में डुप्लिकेट मतदाता मौजूद हैं।
* विरोध प्रदर्शन में एक ही पते से 130 नामों के पंजीकरण का उदाहरण दिया गया। यह भी बताया गया कि नवी मुंबई नगर निगम के आयुक्त का नाम भी मतदाता सूची में गलती से शामिल किया गया है।
* शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रैली में कहा कि उनके नाम को एक फर्जी मोबाइल के जरिए 'सक्षम' ऐप पर अपलोड किया गया था, और उन्हें संदेह है कि यह उनका नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश थी।
* विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) इन गंभीर मुद्दों पर आँखें मूंद रहा है।
निष्पक्ष चुनावों की मांग
विपक्षी नेताओं ने मांग की कि महाराष्ट्र में नगरीय निकाय चुनाव तब तक नहीं कराए जाने चाहिए जब तक कि मतदाता सूची की सभी गड़बड़ियों को ठीक नहीं कर लिया जाता।
* शरद पवार ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र द्वारा दिए गए अधिकारों की रक्षा का समय है और सभी राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन की याद दिलाने वाला बताया और कहा कि उनकी ताकत निर्वाचन आयोग को चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए मजबूर करेगी।
* राज ठाकरे ने स्पष्ट कहा, "इस फर्जी मतदाता सूची के साथ चुनावों की क्या आवश्यकता है? इसे साफ करें और फिर चुनाव कराएं।" उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव पहले ही पाँच साल से विलंबित हैं, इसलिए इन्हें एक साल और आगे बढ़ाने में कोई समस्या नहीं होगी।
पुलिस की अनुमति के बिना मार्च
यह विरोध मार्च मुंबई पुलिस से इजाजत न मिलने के बावजूद आयोजित किया गया। नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर अपनी बात रखी। इस दौरान, मनसे प्रमुख राज ठाकरे अपने समर्थकों के साथ दादर स्टेशन से ट्रेन में सवार होकर चर्चगेट पहुँचे, क्योंकि उन्होंने कार्यकर्ताओं से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की थी।
भाजपा की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र भाजपा ने विपक्ष के इस विरोध प्रदर्शन की आलोचना करते हुए इसे उनके "दोहरे मापदंड" का पर्दाफाश बताया। भाजपा के मीडिया प्रमुख नवनाथ बान ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में, जब MVA ने 48 में से 31 सीटें जीती थीं, तब उन्हें मतदाता सूची पर कोई आपत्ति नहीं थी और उन्होंने जीत का जश्न मनाया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ राजनीति कर रहा है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार का मुकाबला करने के लिए उनके पास कोई मुद्दा नहीं है।
यह विरोध प्रदर्शन पारदर्शी और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रियाओं की मांग को रेखांकित करता है, और पूरे महाराष्ट्र में चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ एक व्यापक विपक्षी आंदोलन का हिस्सा है। ---समाप्त---'वोट चोरी' के खिलाफ मुंबई में महा विकास अघाड़ी और मनसे का 'सत्याचा मोर्चा'
Nov 01, 2025
Harvinder Sidhu | उत्तराखण्ड तहलका,
Harvinder Sidhu | उत्तराखण्ड तहलका,
एकता का प्रदर्शन
इस विरोध मार्च में MVA के प्रमुख नेता - शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के सुप्रीमो शरद पवार, और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट शामिल हुए। खास बात यह रही कि राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे भी इस प्रदर्शन में शामिल हुई, जो चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ एक साझा मंच को दर्शाता है। यह मोर्चा मुंबई की फैशन स्ट्रीट से शुरू होकर लगभग एक किलोमीटर दूर बीएमसी मुख्यालय पर समाप्त हुआ, जहाँ नेताओं ने एक रैली को संबोधित किया।
मतदाता सूची में विसंगतियों के आरोप
नेताओं ने मतदाता सूची में एकाधिक प्रविष्टियों, गलत ढंग से नाम हटाने और नाम जोड़ने जैसी विसंगतियों को उजागर किया।
* राज ठाकरे ने दावा किया कि मुंबई उत्तर लोकसभा सीट पर 17.29 लाख मतदाताओं में से लगभग 62 हजार मतदाता डुप्लिकेट हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई की अन्य सीटों पर भी बड़ी संख्या में डुप्लिकेट मतदाता मौजूद हैं।
* विरोध प्रदर्शन में एक ही पते से 130 नामों के पंजीकरण का उदाहरण दिया गया। यह भी बताया गया कि नवी मुंबई नगर निगम के आयुक्त का नाम भी मतदाता सूची में गलती से शामिल किया गया है।
* शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रैली में कहा कि उनके नाम को एक फर्जी मोबाइल के जरिए 'सक्षम' ऐप पर अपलोड किया गया था, और उन्हें संदेह है कि यह उनका नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश थी।
* विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) इन गंभीर मुद्दों पर आँखें मूंद रहा है।
निष्पक्ष चुनावों की मांग
विपक्षी नेताओं ने मांग की कि महाराष्ट्र में नगरीय निकाय चुनाव तब तक नहीं कराए जाने चाहिए जब तक कि मतदाता सूची की सभी गड़बड़ियों को ठीक नहीं कर लिया जाता।
* शरद पवार ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र द्वारा दिए गए अधिकारों की रक्षा का समय है और सभी राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन की याद दिलाने वाला बताया और कहा कि उनकी ताकत निर्वाचन आयोग को चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए मजबूर करेगी।
* राज ठाकरे ने स्पष्ट कहा, "इस फर्जी मतदाता सूची के साथ चुनावों की क्या आवश्यकता है? इसे साफ करें और फिर चुनाव कराएं।" उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव पहले ही पाँच साल से विलंबित हैं, इसलिए इन्हें एक साल और आगे बढ़ाने में कोई समस्या नहीं होगी।
पुलिस की अनुमति के बिना मार्च
यह विरोध मार्च मुंबई पुलिस से इजाजत न मिलने के बावजूद आयोजित किया गया। नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर अपनी बात रखी। इस दौरान, मनसे प्रमुख राज ठाकरे अपने समर्थकों के साथ दादर स्टेशन से ट्रेन में सवार होकर चर्चगेट पहुँचे, क्योंकि उन्होंने कार्यकर्ताओं से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की थी।
भाजपा की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र भाजपा ने विपक्ष के इस विरोध प्रदर्शन की आलोचना करते हुए इसे उनके "दोहरे मापदंड" का पर्दाफाश बताया। भाजपा के मीडिया प्रमुख नवनाथ बान ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में, जब MVA ने 48 में से 31 सीटें जीती थीं, तब उन्हें मतदाता सूची पर कोई आपत्ति नहीं थी और उन्होंने जीत का जश्न मनाया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ राजनीति कर रहा है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार का मुकाबला करने के लिए उनके पास कोई मुद्दा नहीं है।
यह विरोध प्रदर्शन पारदर्शी और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रियाओं की मांग को रेखांकित करता है, और पूरे महाराष्ट्र में चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ एक व्यापक विपक्षी आंदोलन का हिस्सा है। ---समाप्त---