नई दिल्ली (उत्तराखण्ड तहलका): भारतीय चुनाव आयोग ने 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण की घोषणा की, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता और अखंडता सुनिश्चित करना है। अक्टूबर 27, 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा की गई घोषणा के मुख्य बिंदु: घर-घर जाकर सत्यापन: बूथ लेवल अधिकारी (BLO) 4 नवंबर, 2025 से शुरू होने वाली SIR की व्यापक प्रक्रिया में मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। मतदाताओं को दस्तावेज़ प्रस्तुत करना पड़ सकता है: मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने के लिए दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो सकती है। पिछले SIR के अनुभव से पता चलता है कि पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज़ मांगे जा सकते हैं। आधार कार्ड एक वैकल्पिक पहचान प्रमाण: चुनाव आयोग ने दोहराया कि आधार कार्ड एक वैकल्पिक पहचान प्रमाण है और इसे नागरिकता या निवास के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, जो कि आधार अधिनियम की धारा 9 में भी उल्लिखित है। अयोग्य मतदाताओं को हटाना: SIR प्रक्रिया का उद्देश्य योग्य मतदाताओं को शामिल करना और अयोग्य या दोहराए गए नामों को हटाना है। महत्वपूर्ण समय सीमा प्रारंभ: 4 नवंबर, 2025 से SIR के तहत सत्यापन प्रक्रिया शुरू होगी। मसौदा सूची का प्रकाशन: 9 दिसंबर, 2025 को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जिससे नागरिकों को आपत्ति दर्ज करने का मौका मिलेगा। यह भी पढ़ें: ट्रंप ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध अंतिम सूची का प्रकाशन: SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी। शामिल राज्य और केंद्र शासित प्रदेश SIR के दूसरे चरण में 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं:
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
- छत्तीसगढ़
- गोवा
- गुजरात
- केरल
- लक्षद्वीप
- मध्य प्रदेश
- पुडुचेरी
- राजस्थान
- तमिलनाडु
- उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
असम के लिये अलग प्रावधान: मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यह पुनरीक्षण असम में लागू नहीं होगा, क्योंकि वहां नागरिकता अधिनियम के तहत अलग प्रावधान हैं। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी: असम में नागरिकता की जाँच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है। राजनीतिक दलों का सहयोग: पिछले एसआईआर के दौरान राजनीतिक दलों के साथ सहयोग की मांग की गई थी, और उनसे बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करने का अनुरोध किया गया था। प्रतिक्रिया तंत्र: एसआईआर प्रक्रिया के बारे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नागरिकों को आपत्ति दर्ज करने की अनुमति देने के लिए एक तंत्र स्थापित किया गया था। बिहार के अनुभव से सबक: बिहार में पिछले एसआईआर से मिली जानकारी ने चुनाव आयोग को प्रक्रिया में सुधार करने में मदद की है। कुल मिलाकर, SIR का दूसरा चरण मतदाता सूची को अपडेट करने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है कि आगामी चुनावों में केवल योग्य नागरिक ही मतदान करें। यह आयोग की मतदाता सूची में पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।