मेरठ के सलावा क्षेत्र में हुई सोनू कश्यप की नृशंस हत्या के बाद न्याय की मांग को लेकर उठा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को पुलिस प्रशासन की तमाम तैयारियों और अभेद्य किलेबंदी को धता बताते हुए कश्यप समाज के हजारों लोग कमिश्नरी पार्क में दाखिल हो गए। मुजफ्फरनगर के सोनू कश्यप की हत्या कर शव को जलाने की घटना ने पूरे क्षेत्र के लोगों को उद्वेलित कर दिया है। शहर में भारी पुलिस बल, पीएसी और आरएएफ की तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा तोड़कर पार्क के भीतर पहुंच गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कचहरी के आसपास का इलाका छावनी में तब्दील रहा लेकिन भीड़ के आगे प्रशासनिक तंत्र असहाय नजर आया।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

​पंचायत के दौरान वक्ताओं ने पुलिस द्वारा पेश की गई घटना की कहानी को सिरे से खारिज कर दिया। परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि इतनी जघन्य वारदात को अकेला किशोर अंजाम नहीं दे सकता। समाज के नेताओं ने तर्क दिया कि पुलिस असली दोषियों को बचाने के लिए जल्दबाजी में एक किशोर की गिरफ्तारी कर मामले का पटाक्षेप करना चाहती है। सोनू की बहन आरती ने भावुक होकर इंसाफ की गुहार लगाई और कहा कि जब तक सभी दोषी सलाखों के पीछे नहीं जाते, यह आंदोलन शांत नहीं होगा। पंचायत में एकजुट हुए लोगों ने पुलिसिया जांच पर अविश्वास जताते हुए मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

प्रशासन को अल्टीमेटम और चार बड़ी मांगें


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​काफी देर तक चले हंगामे और तनावपूर्ण माहौल के बीच एडीएम सिटी ब्रिजेश सिंह और एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे। कश्यप समाज ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इसमें पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने, पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने और रहने के लिए जमीन का पट्टा देने की मांग शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुई और जांच का रुख नहीं बदला, तो वे बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगे।

सड़कों पर रेंगता शहर और कानूनी शिकंजा

​इस विरोध प्रदर्शन और पंचायत के चलते मेरठ की रफ्तार पूरी तरह थम गई। कमिश्नरी और कचहरी की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर घंटों जाम लगा रहा, जिसमें स्कूल बसें और एंबुलेंस भी फंसी रहीं। दूसरी ओर, शासन के आदेशों की अवहेलना पर पुलिस ने अब सख्त रुख अपनाया है। इंस्पेक्टर सिविल लाइन सौरभ शुक्ला की तहरीर पर बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत 10 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इन पर गैरकानूनी सभा करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और दंगा भड़काने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

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