लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी के राज्य मुख्यालय पर आज उस वक्त माहौल तनावपूर्ण हो गया जब बसपा प्रमुख मायावती अपना 70वां जन्मदिन मनाने के लिए मीडिया को संबोधित करने वाली थीं। अचानक हॉल में लगे बिजली के उपकरणों में शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते चारों तरफ धुआं फैल गया। इस अप्रत्याशित घटना से वहां मौजूद पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाई, लेकिन इस हंगामे की वजह से न तो सवाल-जवाब का दौर हुआ और न ही पारंपरिक रूप से केक काटा जा सका। हालांकि, इस बाधा के बीच भी मायावती विचलित नहीं हुईं और उन्होंने अपनी 'ब्लू बुक' के 21वें संस्करण का विमोचन करते हुए विरोधियों पर जमकर प्रहार किया।
गठबंधन से तौबा और एकला चलो की नीति
मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन का कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि वे अन्य दलों के बहकावे में न आएं, क्योंकि बसपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करने में सक्षम है। मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि गठबंधन करने से पार्टी को लाभ के बजाय नुकसान ज्यादा होता है, इसलिए बसपा अब केवल जनता के साथ गठबंधन करेगी। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता अब बदलाव चाहती है और वह बदलाव केवल बसपा के अनुशासित शासन से ही संभव है। उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए कैडर को मिशन मोड में काम करने का निर्देश दिया।
ब्राह्मण कार्ड और विरोधियों की घेराबंदी
इस बार के संबोधन में मायावती का सबसे बड़ा निशाना ब्राह्मण वोट बैंक रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और अन्य दलों में ब्राह्मण समाज के जनप्रतिनिधि अपमानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि बसपा के शासनकाल में ब्राह्मणों को सत्ता में सम्मानजनक हिस्सेदारी दी गई थी। आगामी चुनावों के लिए उन्होंने ब्राह्मणों को फिर से बसपा के साथ जुड़ने का आह्वान किया और वादा किया कि सरकार बनने पर उनके हितों की सुरक्षा की जाएगी। साथ ही, उन्होंने पूर्व की समाजवादी पार्टी सरकार पर गुंडाराज और अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए जनता को सचेत किया। मायावती ने विश्वास जताया कि दलितों, पिछड़ों और ब्राह्मणों का यह मेल एक बार फिर इतिहास दोहराएगा और लखनऊ की सत्ता पर बसपा का कब्जा होगा।
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