उत्तर प्रदेश की सड़कों पर हर साल हजारों परिवारों के चिराग सिर्फ इसलिए बुझ जाते हैं क्योंकि वे सिर की सुरक्षा को बोझ समझते रहे हैं। सड़कों पर बहते लहू और मौतों के डरावने आंकड़ों ने अब उत्तर प्रदेश सरकार को कड़े और कड़वे फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह के ताजा निर्देश सीधे तौर पर उन दोपहिया वाहन चालकों के लिए चेतावनी हैं जो अपनी और अपने पीछे बैठे सह-यात्री की जान को जोखिम में डालकर हवा से बातें करते हैं। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि देश में होने वाले कुल सड़क हादसों में लगभग पैंतालीस प्रतिशत हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की है और इनमें होने वाली सत्तर प्रतिशत मौतों का सीधा कारण हेलमेट न पहनना पाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के निर्देशों के बाद अब शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सड़कों पर होने वाला यह खूनी खेल अब नियमों की सख्ती से ही थमेगा क्योंकि समझाइश का दौर अब बीत चुका है।
डीलर से लेकर सड़क तक हर कदम पर कड़ी घेराबंदी: नहीं बचेंगे नियम तोड़ने वाले
सरकार का यह नया आदेश केवल सड़कों पर चालान काटने तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी जड़ें अब शोरूम तक पहुंच गई हैं। अब कोई भी वाहन डीलर बिना दो आईएसआई मार्का हेलमेट दिए बाइक या स्कूटी की बिक्री नहीं कर पाएगा। वाहन खरीदने वाले को ही इन दोनों हेलमेट की कीमत चुकानी होगी और इसका बाकायदा प्रमाण पत्र परिवहन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि कोई भी चालक यह बहाना न बना सके कि उसके पास सह-यात्री के लिए हेलमेट उपलब्ध नहीं था। जो लोग कानून को ठेंगा दिखाकर सड़कों पर निकलते हैं उनके लिए अब एक हजार रुपये का आर्थिक दंड तो शुरुआती चोट है असली प्रहार उनके ड्राइविंग लाइसेंस पर होगा। तीन महीने के लिए लाइसेंस का निलंबन न केवल उनके वाहन चलाने के अधिकार को छीनेगा बल्कि उन्हें यह अहसास भी कराएगा कि एक छोटी सी लापरवाही पूरे करियर और जीवन पर भारी पड़ सकती है।
लापरवाही की कीमत अब जिंदगी से नहीं बल्कि कानून के हंटर से चुकानी होगी
अक्सर देखा गया है कि बाइक चलाने वाला व्यक्ति तो हेलमेट लगा लेता है लेकिन पीछे बैठी सवारी को वह सुरक्षित मानकर चलता है जबकि हादसों के वक्त सबसे ज्यादा चोट सिर में लगने के कारण ही मौतें होती हैं। सात अक्टूबर दो हजार पच्चीस को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जताई गई चिंता इस बात का प्रमाण है कि यह मुद्दा अब केवल यातायात प्रबंधन का नहीं बल्कि मानवाधिकार और जीवन रक्षा का बन गया है। उत्तर प्रदेश प्रशासन का यह रुख उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो हेलमेट को सिर्फ पुलिस से बचने का जरिया मानते हैं। सरकार का यह मानना है कि दोपहिया वाहनों की लापरवाही ही अधिकांश हादसों की जननी है। इसलिए अब सिस्टम ने ऐसी घेराबंदी तैयार की है जिससे बच निकलना नामुमकिन होगा। चाहे वह नया वाहन खरीदने वाला ग्राहक हो या सड़कों पर फर्राटा भरते पुराने चालक अब हर किसी को सिर पर सुरक्षा का कवच बांधना ही होगा अन्यथा कानून का हंटर उन्हें सबक सिखाने के लिए तैयार खड़ा है।
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