उत्तराखंड पुलिस महकमे में शुक्रवार शाम हुए बड़े फेरबदल में सबसे अधिक चर्चा ऊधमसिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा की हो रही है। अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली और अपराधियों के प्रति कड़े रुख के लिए पहचाने जाने वाले आईपीएस मणिकांत मिश्रा को अब जिले की कमान से हटाकर एसपी अभिसूचना (इंटेलिजेंस) के पद पर तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश की कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से किए गए इस बदलाव में मणिकांत मिश्रा का नाम प्रमुखता से उभरा है। उनके स्थान पर अब चंपावत के पूर्व एसपी अजय गणपति कुम्भार को ऊधमसिंह नगर की सुरक्षा व्यवस्था संभालने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ऑपरेशन लंगड़ा और १६ महीनों का बेखौफ सफर
मणिकांत मिश्रा ने ६ सितंबर २०२४ को ऊधमसिंह नगर जिले के एसएसपी के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके लगभग १६ महीनों के कार्यकाल के दौरान जिले में अपराधियों के बीच भारी दहशत देखी गई। उन्होंने 'ऑपरेशन लंगड़ा' के नाम से एक विशेष अभियान चलाया था, जो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना। इस अभियान के तहत जिले की पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान लगभग ३८ कुख्यात बदमाशों के पैरों में गोली मारकर उन्हें गिरफ्तार किया। मणिकांत मिश्रा की इस रणनीति ने न केवल अपराध के ग्राफ को नियंत्रित करने की कोशिश की, बल्कि पुलिस के इकबाल को भी मजबूत किया। उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की रही जो मौके पर पहुंचकर खुद मोर्चा संभालना पसंद करते थे।
सफलता की चमक के बीच विवादों का साया
कहते हैं कि प्रशासनिक सेवा में सफलता के साथ-साथ चुनौतियां और विवाद भी साथ चलते हैं। मणिकांत मिश्रा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। बीते महीने काशीपुर के पैगा गांव में रहने वाले सुखवंत सिंह द्वारा खुदकुशी किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया। मृतक द्वारा गोली मारकर आत्महत्या करने के प्रकरण में सीधे तौर पर एसएसपी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिससे शासन स्तर पर भी खलबली मच गई थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी बेदाग छवि पर लगे इस हालिया विवाद के दाग की वजह से ही उन्हें फील्ड पोस्टिंग से हटाकर इंटेलिजेंस विभाग की महत्वपूर्ण लेकिन पर्दे के पीछे वाली जिम्मेदारी दी गई है।
नए दायित्व और पुलिस महकमे का भविष्य
मणिकांत मिश्रा का तबादला केवल एक व्यक्ति का स्थानांतरण नहीं है, बल्कि यह जिले में पुलिसिंग के एक खास तरीके का अंत भी माना जा रहा है। उनके बाद आए अजय गणपति कुम्भार के सामने अब मणिकांत मिश्रा द्वारा स्थापित किए गए कड़े मानकों को बरकरार रखने की चुनौती होगी। शासन ने मिश्रा के अनुभव को देखते हुए उन्हें अभिसूचना विभाग जैसी संवेदनशील जगह पर तैनात किया है, जहाँ उनकी सूक्ष्म नजर और रणनीतिक कौशल का लाभ प्रदेश सरकार को मिल सके। प्रदेश के अन्य सात जिलों के कप्तानों के साथ हुए इस फेरबदल ने यह साफ कर दिया है कि सरकार अब प्रदर्शन और छवि दोनों को समान महत्व दे रही है।
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