महाराष्ट्र (Uttarakhand Tehelka) साइबर पुलिस ने हाल ही में एक बड़े और सुसंगठित International Cyber ​​Fraud Network का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है। इस आपराधिक नेटवर्क के तार कई प्रमुख एशियाई देशों तक फैले हुए हैं, जिसमें विशेष रूप से चीन, हांगकांग और इंडोनेशिया के मास्टरमाइंड शामिल हैं। यह गिरोह भारत भर के भोले-भाले नागरिकों को निशाना बना रहा था, उन्हें आकर्षक निवेश योजनाओं, उच्च वेतन वाली नकली नौकरियों और ऑनलाइन लॉटरी जीतने का झांसा देकर उनसे लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। यह खुलासा भारत की वित्तीय सुरक्षा और साइबर संप्रभुता के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।

​ठगी का जटिल तरीका और विदेशी कनेक्शन

​जांच में पता चला है कि यह International Cyber ​​Fraud Network एक अत्यंत जटिल और बहुस्तरीय तरीके से काम करता था। ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप, और मैसेजिंग ऐप्स का उपयोग करके पहले पीड़ितों के साथ विश्वास बनाते थे। एक बार विश्वास जम जाने पर, वे उन्हें नकली निवेश वेबसाइटों या क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग में त्वरित लाभ का झांसा देते थे। कई मामलों में, उन्होंने नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाया, उनसे 'सुरक्षा जमा' (Security Deposit) या 'प्रसंस्करण शुल्क' (Processing Fee) के नाम पर पैसे ऐंठे।

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​पीड़ितों से प्राप्त धन को तुरंत भारत में विभिन्न डमी खातों (Dummy Accounts) और शेल कंपनियों (Shell Companies) के एक जटिल जाल के माध्यम से रूट किया जाता था। इस धन का अंतिम गंतव्य तेजी से विदेशों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, अक्सर क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।


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​महाराष्ट्र साइबर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस International Cyber ​​Fraud Network के मुख्य मास्टरमाइंड चीन, हांगकांग और इंडोनेशिया में सक्रिय हैं, जहां से वे पूरे ऑपरेशन को रिमोटली नियंत्रित करते थे। ये विदेशी नागरिक भारत में स्थानीय सहयोगियों (Local Modules) की मदद लेते थे, जो भारत में आसानी से सिम कार्ड, बैंक खाते और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट उपलब्ध कराते थे, जिससे विदेशी मास्टरमाइंड कानून के शिकंजे से बाहर बने रहते थे। पुलिस ने इस संबंध में मुंबई, पुणे और नागपुर के तकनीकी हब सहित कई संवेदनशील स्थानों पर समकालिक छापेमारी की है।

Cyber ​​Fraud Network पर कानूनी कार्रवाई और अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियां

​महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने अब तक इस मामले में एक दर्जन से अधिक भारतीय सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान उनके पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, और बैंक दस्तावेजों सहित करोड़ों रुपये की नकदी और बड़ी मात्रा में क्रिप्टोकरेंसी (विशेष रूप से USDT और बिटकॉइन) जब्त की गई हैं। पुलिस ने International Cyber ​​Fraud Network से सम्बन्धित गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की संबंधित धाराओं और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धोखाधड़ी (420) और आपराधिक साजिश (120B) जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

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​इस जांच में सबसे बड़ी चुनौती धन के विदेशी हस्तांतरण को ट्रैक करना और विदेशी मास्टरमाइंडों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करना है। साइबर पुलिस अब इंटरपोल (Interpol) और संबंधित एशियाई देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद ले रही है। उनका लक्ष्य विदेशी सर्वरों से डेटा प्राप्त करना, संदिग्ध खातों पर ग्लोबल फ्रीज लगाना और अंततः पीड़ितों के धन को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करना है। यह जांच एक बार फिर यह दर्शाती है कि भारत के नागरिक विदेशी स्थित साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन रहे हैं, जिससे निपटने के लिए न केवल अंतर्राष्ट्रीय कानूनी सहयोग बल्कि नागरिक स्तर पर डिजिटल और साइबर जागरूकता की तत्काल आवश्यकता है।

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