तेंदुए का वीडियो वायरल होने के बाद पिछले अड़तालीस घंटों से क्षेत्र में दहशत का माहौल था। उसके बाद जब कुछ लोगों को तेंदुए की पहली झलक दिखाई दी, तो इलाके में हड़कंप मच गया। लोगों के चेहरों पर खौफ की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं और डर के मारे लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया था। तेंदुए की मौजूदगी की खबर जैसे ही आग की तरह फैली, वैसे ही प्रशासन और वन विभाग के हाथ-पांव फूल गए। स्थानीय निवासी हर आहट पर सहम रहे थे। तेंदुए की मौजूदगी की आशंका वाले स्थान पर ऊँची-ऊँची झाड़ियों ने इस शिकारी को छिपने का सबसे सुरक्षित ठिकाना दे दिया था, जिससे खतरा कई गुना बढ़ गया था। 

 

मौत के मुहाने पर विधायक शिव अरोरा की जांबाजी और साहसी कदम

जब स्थिति अनियंत्रित होने लगी तो क्षेत्रीय विधायक शिव अरोरा खुद मोर्चे पर उतर आए। डीएफओ और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे विधायक ने बिना किसी देरी के सीधे उन खेतों का रुख किया जहां तेंदुए के छिपे होने की पुख्ता जानकारी मिली थी। एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने प्रोटोकॉल से हटकर अपनी जान जोखिम में डाली और उस घने खेत के अंदर तक चले गए जहां तेंदुआ घात लगाए बैठा था। विधायक और खूंखार शिकारी के बीच महज कुछ कदमों का फासला रह गया था। यह दृश्य जितना रोमांचक था उतना ही रोंगटे खड़े कर देने वाला भी था। अरोरा ने मौके पर ही अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी कीमत पर इस तेंदुए को सुरक्षित पकड़ना ही एकमात्र विकल्प है।

वन विभाग का चक्रव्यूह और घंटों चली जद्दोजहद के बाद मिली कामयाबी

विधायक के कड़े निर्देश मिलते ही वन विभाग की टीम ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। डीएफओ उमेश कुमार तिवारी के नेतृत्व में जाल, पिंजरे और अत्याधुनिक उपकरणों को तैनात किया गया। तेंदुए की सटीक लोकेशन जानने के लिए हाई-टेक कैमरे लगाए गए और वन कर्मियों ने चारों तरफ से घेराबंदी शुरू कर दी। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तनाव इतना अधिक था कि हर पल किसी अनहोनी का डर बना हुआ था। कई घंटों की कड़ी मशक्कत और घेराबंदी के बाद आखिरकार वन विभाग की टीम तेंदुए को जाल में फंसाने में कामयाब रही। भारी संघर्ष के बाद उसे सुरक्षित पिंजरे में कैद किया गया, जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली।


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घायल तेंदुए का उपचार और दहशत के साये से आजाद हुआ सिडकुल

पकड़े गए तेंदुए की जांच करने पर उसके शरीर पर चोट के गहरे निशान मिले हैं। अभी यह पहेली बनी हुई है कि वह किसी अन्य जानवर से संघर्ष में घायल हुआ या किसी वाहन की चपेट में आया था। फिलहाल विभाग ने उसे रेस्क्यू सेंटर भेज दिया है जहां विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज किया जाएगा। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उसे दोबारा घने जंगलों में छोड़ा जाएगा। इस सफल ऑपरेशन में तहसीलदार दिनेश कुमार, वन दरोगा विपिन पांडेय और सिडकुल पुलिस की अहम भूमिका रही। तेंदुए के पकड़े जाने के साथ ही रुद्रपुर की जनता ने चैन की सांस ली है और पिछले दो दिनों से थमी हुई जिंदगी अब दोबारा पटरी पर लौटने लगी है।

 

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