उत्तर प्रदेश के रामपुर जनपद में अवैध खनन को लेकर पिछले दिनों डिजिटल मीडिया के गलियारों में जो शोर सुनाई दे रहा था, उसकी सच्चाई अब पूरी तरह साफ हो गई है। करीब छह दिन पूर्व यानी 20 दिसम्बर को अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म अमर उजाला उत्तर प्रदेश पर प्रसारित की गई एक खबर ने रामपुर के प्रशासनिक अमले और खनन कारोबारियों के बीच खलबली मचा दी थी। अमर उजाला ने इस खबर को "कोसी कोसती है: रामपुर में अफसर-माफिया गठजोड़ से अवैध खनन, दिन-रात चल रहा गंदा खेल" शीर्षक के साथ प्रसारित किया था। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कोसी नदी के तट पर अफसर और खनन माफियाओं के बीच गहरा गठजोड़ है, जिसकी वजह से जनपद में पचास से अधिक स्थानों पर दिन-रात नियमों को ताक पर रखकर खनन का काला खेल चल रहा है। खबर के प्रसारित होते ही रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए थे।

​प्रशासनिक जांच के दौरान जो तथ्य निकलकर सामने आए, उन्होंने इस खबर की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट तौर पर अमर उजाला की इस रिपोर्ट को भ्रामक और तथ्यों से परे करार दिया है। जिलाधिकारी द्वारा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर इस खबर का खंडन करते हुए बताया गया कि खबर में जिन दृश्यों का प्रयोग किया गया है, उनका रामपुर जनपद से कोई सरोकार नहीं है। अमर उजाला बरेली के सह संपादक शशांक मिश्र द्वारा जारी किए गए इस वीडियो को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है और इसे जनता के बीच भ्रम फैलाने वाला बताया है।

​इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए और अमर उजाला के दावों व प्रशासन का पक्ष जानने के लिए जब उत्तराखंड तहलका न्यूज़ की टीम ने धरातल पर पहुंचकर तथ्यों की पड़ताल शुरू की, तो अमर उजाला के दावे पूरी तरह फर्जी साबित हुए। उत्तराखंड तहलका न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्टिंग और फैक्ट चेक में यह कड़वा सच सामने आया कि खबर में दिखाए गए अवैध खनन और परिवहन के विजुअल्स असल में उत्तर प्रदेश के रामपुर के थे ही नहीं। हमारे संवाददाता ने मौके पर पहुंचकर जब स्थलीय निरीक्षण किया और स्थानीय पहचान की, तो पता चला कि वह वीडियो उत्तराखंड के जनपद उधम सिंह नगर की तहसील काशीपुर के ग्राम नूरपुर के थे। अमर उजाला ने उत्तराखंड के क्षेत्र में हो रही गतिविधियों को गलत तरीके से रामपुर का बताकर सनसनी फैलाने की कोशिश की थी।

​काशीपुर के ग्राम नूरपुर की भौगोलिक स्थिति और वहां के दृश्यों का मिलान करने के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि डिजिटल प्लेटफार्म पर चली वह खबर पत्रकारिता के मानकों के विपरीत थी। उत्तराखंड तहलका न्यूज़ की इस पड़ताल ने न केवल प्रशासन के पक्ष को मजबूती दी है बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि बिना गहन जांच और स्थलीय पुष्टि के प्रसारित की गई खबरें समाज और व्यवस्था के लिए कितनी घातक हो सकती हैं। फिलहाल इस मामले के खुलासे के बाद पत्रकारिता जगत और प्रशासनिक हलकों में अमर उजाला की इस बड़ी चूक को लेकर व्यापक चर्चा होना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि अमर उजाला प्रबंधन अपनी साख बचाने के लिए ऐसे लापरवाह कर्मचारियों पर क्या कड़ा एक्शन लेता है।


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