कानपुर के सचेंडी में जो हुआ, वह महज एक अपराध नहीं बल्कि समूचे प्रशासन के मुंह पर करारा तमाचा है। एक 14 साल की मासूम, जिसका बचपन गरीबी और मां के अभाव में सिसक रहा था, उसे वर्दी के साये में पल रहे दरिंदों ने अपना शिकार बना लिया। यह खबर कलेजा चीर देने वाली है कि जिस दरोगा को जनता की सुरक्षा की कसम दिलाई गई थी, वह अपनी सरकारी हनक के बीच काली स्कॉर्पियो में बैठकर तमाशा देखता रहा और उसका कथित पत्रकार साथी छात्रा की रूह को छलनी करता रहा। यह कोई साधारण सामूहिक दुष्कर्म नहीं है, बल्कि रक्षक और भक्षक के उस नापाक गठजोड़ का नतीजा है, जो रसूख के काले धंधे से लेकर मासूमों की अस्मत लूटने तक फैला हुआ है। सोमवार की रात करीब 10 बजे जब मासूम को उसके घर के पास से किडनैप किया गया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि कानून का एक रखवाला ही इस घिनौनी वारदात का मुख्य सूत्रधार निकलेगा।
सिस्टम की संवेदनहीनता और बचाने की नाकाम कोशिश
इस पूरे मामले में पुलिसिया तंत्र का वह चेहरा भी सामने आया जो अक्सर अपराधियों को ढाल प्रदान करता है। वारदात के बाद जब बदहवास परिजन अपनी घायल बेटी को लेकर न्याय की गुहार लगाने पुलिस चौकी पहुंचे, तो मदद के बजाय उन्हें वहां से दुत्कार कर भगा दिया गया। अपनों को बचाने की बेचैनी इस कदर थी कि शुरुआती एफआईआर में आरोपियों के नाम तक गायब कर दिए गए और पॉक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराओं को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। यह रसूखदार अपराधियों और विभाग के अपने दरोगा अमित कुमार मौर्या को बचाने की एक सोची-समझी साजिश थी। जब पीड़ित पक्ष ने हार नहीं मानी और आक्रोश की ज्वाला शासन तक पहुंची, तब जाकर पुलिस के आला अधिकारियों की नींद टूटी। पुलिस कमिश्नर की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया गया था।

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सत्ता का हंटर और लापरवाह अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई
जनता के भारी दबाव और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने अंततः कड़ा कदम उठाया है। लापरवाही और मामले को दबाने की कोशिश करने के गंभीर आरोपों में बुधवार को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने DCP वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी को हटाकर DCP हेड क्वार्टर से अटैच कर दिया गया है। सचेंडी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है क्योंकि उन पर आरोप है कि उन्होंने मुकदमे में पॉक्सो एक्ट की धाराएं नहीं लगाईं और विवेचना के दौरान तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। यह कार्रवाई उन सभी अफसरों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अपनी एयरकंडीशंड कुर्सियों पर बैठकर जमीनी हकीकत से आंखें मूंद लेते हैं और मातहतों के अपराधों पर पर्दा डालते हैं।
अपराधी दरोगा की तलाश और साक्ष्यों का संकलन
कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने मामले की कमान संभालते हुए स्पष्ट किया है कि वर्दी की आड़ में छिपे दरिंदों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जिस स्कॉर्पियो (UP 78 JJ 9331) में इस हैवानियत को अंजाम दिया गया था, वह आरोपी दरोगा अमित कुमार मौर्या की ही पाई गई है जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। जांच में सामने आया है कि दरोगा का पत्रकार शिवबरन के साथ गहरा मेल-जोल था। फिलहाल पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन मुख्य आरोपी दरोगा अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश में चार टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम ने पहुंचकर अहम साक्ष्य जुटाए हैं ताकि वैज्ञानिक आधार पर इन दरिंदों को सजा दिलाई जा सके। एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच प्रक्रिया को गति दी है।
पूर्व सांसद ने लगाये सरकार पर गंभीर आरोप
इस घटना ने कानपुर सहित पूरे प्रदेश को आंदोलित कर दिया है। पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बनकर मासूमों का जीवन तबाह करने लगें, तो समाज में असुरक्षा का भाव गहरा होना लाजमी है। यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी या निलंबन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह उस तंत्र की शुद्धि का अवसर होना चाहिए जहां अपराधी खाकी पहनकर बेखौफ घूम रहे हैं। पीड़िता, जो पहले से ही कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रही थी, अब एक ऐसे मानसिक आघात से गुजर रही है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
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