उन्नाव की जिला अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए समाज में नफरत और हिंसा फैलाने वालों को कड़ा संदेश दिया है। न्यायाधीश कविता मिश्रा ने भाकियू नेता विनोद कश्यप की हत्या के चारों आरोपियों काले खां, उसके बेटे जमेश, छोटे उर्फ छोटू खां और शहबाज उर्फ सोहेल को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की और कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध समाज में केवल भय और अराजकता का माहौल पैदा करते हैं। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े आयोजनों के दौरान हिंसा करना और किसी की जान लेना अक्षम्य है, इसलिए ऐसे अपराधियों को समाज में उदाहरण पेश करने के लिए कठोरतम सजा दिया जाना अनिवार्य है। अदालत ने बचाव पक्ष की उन सभी दलीलों को खारिज कर दिया जिसमें सजा कम करने की मांग की गई थी।

अयोध्या उत्सव के बीच चंदे पर हुआ था खूनी विवाद

इस खूनी वारदात की शुरुआत 14 जनवरी 2024 को हुई थी, जब पूरा देश और विशेषकर उत्तर प्रदेश अयोध्या में होने वाली रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारियों के उल्लास में डूबा था। उन्नाव के गंगाघाट थाना क्षेत्र के चंपापुरवा मोहल्ले में स्थित एक पुराने शिव मंदिर में भी धार्मिक अनुष्ठान और भंडारे का आयोजन तय किया गया था। भारतीय किसान यूनियन के सक्रिय नेता विनोद कश्यप का छोटा भाई बउवा कश्यप इस आयोजन के लिए टोली के साथ मोहल्ले में चंदा एकत्र करने निकला था। जैसे ही चंदा मांगने वाली यह टोली जय श्रीराम के नारे लगाते हुए गोताखोर मोहल्ले के पास पहुंची, वहां मौजूद काले खां और उसके बेटों ने माहौल को सांप्रदायिक रंग देते हुए विवाद शुरू कर दिया।

नारेबाजी पर आपत्ति और जानलेवा हमला

प्रत्यक्षदर्शियों और मृतक की पत्नी प्रीति कश्यप के अनुसार, बउवा कश्यप जब चंदा मांगते हुए जय श्रीराम का उद्घोष कर रहा था, तब आरोपियों ने उसे रोक लिया। आरोपियों ने न केवल नारेबाजी पर आपत्ति जताई बल्कि बउवा से अवैध रूप से रुपयों की मांग भी शुरू कर दी। जब बउवा ने पैसे देने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उस पर हमला बोल दिया। अपने भाई को पिटता देख विनोद कश्यप उसे बचाने के लिए मौके पर दौड़े, लेकिन हमलावरों ने उन पर भी घातक हथियारों और पत्थरों से हमला कर दिया। दोनों भाइयों के सिर पर गंभीर चोटें आईं और वे मौके पर ही लहूलुहान होकर बेहोश हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान विनोद कश्यप की मृत्यु हो गई।

कानूनी प्रक्रिया और न्याय की अंतिम जीत

इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया था और पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 15 जनवरी 2024 को चारों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तेजी से जांच की और महज 40 दिनों के भीतर यानी 23 फरवरी 2024 को अदालत में पुख्ता चार्जशीट दाखिल कर दी। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और मौके से बरामद साक्ष्यों को इतनी मजबूती से रखा कि आरोपियों का बचना नामुमकिन हो गया। कोर्ट ने माना कि यह हमला पूरी तरह से पूर्व नियोजित था और इसका उद्देश्य समाज में दहशत फैलाना था। आज इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है और इसे न्याय की जीत बताया है।


Advertisement

---समाप्त---