चंडीगढ़, 20 अक्टूबर। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक समाचार कंपनी के बंद किए गए फेसबुक पेज को दोबारा शुरू करने का आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट निर्णय दिया है कि पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्तर के अधिकारी को किसी समाचार कंपनी अथवा यूजर का सोशल मीडिया पेज ब्लॉक करवाने की सिफारिश करने का कानूनी अधिकार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी तय किया है कि किसी भी यूजर का कंटेंट रुकवाने के लिए यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सूचना भेजी जाती है, तो उसकी एक प्रति तत्काल उस संबंधित यूजर को भी दी जानी चाहिए।

​डीआईजी से नीचे का अधिकारी अधिकृत नहीं

​हाईकोर्ट में जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकार क्षेत्र के बिंदु पर स्थिति साफ की। अदालत ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत ऐसी कोई भी सूचना भेजने वाला पुलिस अधिकारी कम से कम उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) पद का होना चाहिए। यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक के पास यह अधिकार नहीं था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी ऐसा कोई नियम अथवा प्रावधान पेश नहीं किया जा सका, जिससे यह साबित हो सके कि यह अधिकार एसपी को सौंपा गया था।

​प्राकृतिक न्याय के तहत सूचना पाना हक


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​मामले की सुनवाई के दौरान आईटी नियम, 2021 के नियम 3(2) पर भी विचार किया गया। अदालत ने माना कि इस नियम में प्रभावित यूजर को सूचना देने का सीधा उल्लेख भले न हो, लेकिन प्राकृतिक न्याय का तकाजा यही है कि जिस व्यक्ति अथवा संस्था की सामग्री रोकी जा रही है, उसे इस कदम की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। अदालत ने इस कानूनी व्यवस्था को नियम का स्वाभाविक हिस्सा मानते हुए स्पष्ट किया कि इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को नोटिस भेजते ही उसकी एक कॉपी सीधे प्रभावित यूजर को सौंपना कानूनी रूप से जरूरी है।

​यमुनानगर पुलिस के आरोपों पर सुनवाई

​यह पूरा विवाद हरियाणा 24 न्यूज़ नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से जुड़ा था। यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक की ओर से भेजी गई सूचना के आधार पर कंपनी का फेसबुक पेज बंद कर दिया गया था। पुलिस का पक्ष था कि कंपनी का एक निदेशक जबरन वसूली के आपराधिक मामले में नामजद आरोपी है और उक्त फेसबुक पेज का उपयोग पीड़ित पक्ष को डराने के उद्देश्य से किया जा रहा था। अदालत ने इन आरोपों के बीच मुख्य रूप से इस कानूनी प्रक्रिया की पड़ताल की कि पेज बंद कराने के लिए अपनाई गई पद्धति नियमों के अनुरूप थी अथवा नहीं।

​शिकायत की कॉपी पीड़ित को देना जरूरी

​याचिकाकर्ता को पुलिस की सूचना की प्रति न मिलने के कारण हाईकोर्ट ने इस विवाद को फेसबुक की आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली के पास भेजने से भी साफ मना कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि जब पीड़ित पक्ष को अपने खिलाफ की गई शिकायत या आदेश की जानकारी ही नहीं दी गई, तो वह प्लेटफॉर्म के पास अपना पक्ष कैसे रख सकता था। अदालत ने आगे के लिए भी निर्देश दिया है कि यदि भविष्य में जांच एजेंसियों को पेज पर कोई गैरकानूनी सामग्री मिलती है, तो प्लेटफॉर्म को सूचना भेजने के तुरंत बाद याचिकाकर्ता को उसकी प्रति उपलब्ध करानी होगी।

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