पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ लगातार मुहिम चला रहे 45 साल के परविंदर सिंह झोटा की सरेआम गोली मारकर की गई हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से धर दबोचा है। मंगलवार को जब झोटा फेसबुक लाइव कर रहे थे, तभी अश्विनी ने सामने आकर ताबड़तोड़ तीन गोलियां बरसा दी थीं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी और आरोपी मौका देखकर फरार हो गया था। पुलिस की टीमें लगातार उसकी तलाश में दबिश दे रही थीं और तकनीकी मदद के जरिए उसे दूसरे राज्य से पकड़ लिया गया।

​आरोपी के ठिकाने पर कार्रवाई

​वारदात के बाद गुस्साए लोगों का आक्रोश देख प्रशासन भी तुरंत हरकत में आ गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नगर प्रशासन ने आरोपी अश्विनी कुमार के मकान को बुलडोजर से ढहा दिया। इसके साथ ही जिस मेडिकल स्टोर को लेकर पूरा विवाद खड़ा हुआ था, उस पर भी कार्रवाई की गई। इससे पहले आक्रोशित स्थानीय लोगों ने मेडिकल स्टोर में जमकर तोड़फोड़ की थी और गुस्से में आकर आग के हवाले कर दिया था। मौके पर हालात बेकाबू न हों, इसके लिए पुलिस अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया।

​बाजार बंद, सियासत गरमाई

​झोटा की हत्या के विरोध में आज सिख संगठनों और स्थानीय लोगों ने मानसा के बाजार पूरी तरह बंद करवा दिए। सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। पीड़ित परिवार ने इंसाफ मिलने तक अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया है। परिजनों की मांग है कि पूरे हत्याकांड की निष्पक्ष जांच सीबीआई को सौंपी जाए और राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान व डीजीपी गौरव यादव अपने पद से इस्तीफा दें। मानसा की तरफ कूच कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, अकाली दल नेता मनप्रीत अयाली और पूर्व विधायक किक्की ढिल्लों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया ताकि शहर का माहौल न बिगड़े।

​मानवाधिकार आयोग की सख्ती

​मामला तूल पकड़ते ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी से इस पूरी घटना पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। शहर में अभी भी माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है और प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात है।


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