भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में जेफरी एपस्टीन के साथ अपने संबंधों को लेकर चल रही चर्चाओं पर विस्तृत सफाई पेश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक राजनयिक के रूप में कार्य करते समय विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली लोगों से संवाद करना उनकी आधिकारिक जिम्मेदारी का हिस्सा था। पुरी ने स्वीकार किया कि जब वे न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के तौर पर तैनात थे, तब उनकी मुलाकात एपस्टीन से हुई थी। मंत्री के अनुसार, ये मुलाकातें किसी व्यक्तिगत स्वार्थ या निजी संबंध के कारण नहीं बल्कि थिंक-टैंक और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक आयोजनों के दौरान हुई थीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उस समय एपस्टीन की छवि एक हाई-प्रोफाइल शख्सियत की थी और किसी को भी उसके भविष्य के अपराधों या छिपे हुए काले कारनामों की जानकारी नहीं थी।

संसद में गूंजा विवाद और विपक्ष का कड़ा रुख

इस विषय ने राजनीतिक गलियारों में तब हलचल पैदा कर दी जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद के सत्र के दौरान हरदीप पुरी का नाम लेते हुए एपस्टीन मामले से उनके जुड़ाव का जिक्र किया। राहुल गांधी के इस हमले ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों का तर्क है कि सरकार को इस मामले की पारदर्शिता के साथ जांच करानी चाहिए और जनता के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। दूसरी ओर, हरदीप पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह से काल्पनिक और दुर्भावनापूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति से हाथ मिलाने या एक ही कार्यक्रम में मौजूद रहने का अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि वे उसके अनैतिक कार्यों के सहभागी हैं।

चरित्र हनन की राजनीति और पेशेवर साख

हरदीप पुरी ने अपने बयान में इस बात को रेखांकित किया कि विपक्ष के पास रचनात्मक मुद्दों की कमी है, जिसके कारण वे दशकों पुराने और अप्रासंगिक विषयों को उठा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें पूरी तरह पेशेवर थीं और उनके पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि यौन अपराधी के साथ उनके संबंधों का आरोप न केवल बेबुनियाद है बल्कि यह उनकी लंबी और बेदाग पेशेवर साख को धूमिल करने की एक सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के गिरते स्तर का प्रतीक बताते हुए कहा कि बिना तथ्यों के संसद जैसे पवित्र मंच का उपयोग व्यक्तिगत हमलों के लिए किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

वैश्विक संदर्भ और कूटनीति की चुनौतियां

यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि कूटनीतिक जगत की चुनौतियों को भी दर्शाता है। अक्सर राजनयिकों को ऐसे कार्यक्रमों में जाना पड़ता है जहां समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल होते हैं। हरदीप पुरी ने इसी तर्क को आधार बनाते हुए कहा कि न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक केंद्र में सक्रिय रहने वाले हर राजनयिक के लिए यह संभव नहीं है कि वह हर अतिथि के भविष्य के अपराधों का पूर्वानुमान लगा सके। यह पूरा प्रकरण अब भारतीय राजनीति में नैतिकता और पेशेवर जिम्मेदारी के बीच की बहस बन चुका है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि वे इस मुद्दे पर रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रुख अपनाते रहेंगे और विपक्ष के हर सवाल का जवाब तथ्यों के साथ देंगे।


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