सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर सक्रिय राजनीतिक टिप्पणीकार अभिजीत दीपके और 'कॉकरोचेज...' (Cockroaches...) नामक हैंडल से किए गए सिलसिलेवार पोस्ट्स ने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। इन हैंडल्स द्वारा एक पुराने अंग्रेजी लेख का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए सनसनीखेज सवाल दागे गए, जिसके बाद यह पोस्ट देखते ही देखते हजारों यूजर्स तक पहुंच गई और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

2006 का केएसटीपी प्रोजेक्ट और सुसाइड नोट का दावा
वायरल पोस्ट में केरल के पूर्व वित्त मंत्री और सीपीआई(एम) नेता टी. एम. थॉमस इसाक के पुराने बयानों का संदर्भ दिया गया है। मामला वर्ष 2006 का है, जब विश्व बैंक पोषित केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत काम कर रहे मलेशियाई नागरिक ली बीन सीन ने आत्महत्या कर ली थी। सोशल मीडिया पर प्रसारित अंश में दावा किया गया कि ली के सुसाइड नोट में लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए थे, जिसमें तत्कालीन पीडब्ल्यूडी सचिव ज्ञानेश कुमार का नाम भी शामिल था। इसी पैराग्राफ को आधार बनाकर अब ऑनलाइन मंचों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
विजिलेंस जांच और राजनीतिक रस्साकशी
उस दौरान इस पूरे मामले में राज्य स्तर पर विजिलेंस जांच बिठाई गई थी और 2006 के अंत से पहले ज्ञानेश कुमार को पीडब्ल्यूडी विभाग से स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार के अहम मंत्रालयों में तैनात रहे। अभिजीत दीपके और संबंधित सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा वर्षों पुराने इस घटनाक्रम को दोबारा सामने लाए जाने के बाद इंटरनेट पर दोतरफा बहस छिड़ गई है। जहां एक वर्ग इसे निष्पक्ष जांच और जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरे वर्ग का मानना है कि बंद हो चुके दशकों पुराने मामलों के चुनिंदा अंश काटकर संवैधानिक संस्थाओं के पदाधिकारियों की छवि पर सवाल खड़े करने की कोशिश की जा रही है।
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