देश के सियासी गलियारों में कल उस वक्त अचानक हड़कंप मच गया, जब फेसबुक और व्हाट्सएप पर चुनाव आयोग के लेटरहेड वाली एक चिट्ठी धड़ल्ले से शेयर की जाने लगी। इस वायरल चिट्ठी को जिसने भी देखा, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, क्योंकि इसमें दावा किया गया था कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना इस्तीफा भेज दिया है। हाल के दिनों में मतदाता सूची संशोधन यानी एसआईआर और आयोग के अंदरूनी मतभेदों को लेकर विपक्षी दल लगातार उन पर हमलावर थे। ऐसे में जैसे ही यह पत्र लोगों के मोबाइल स्क्रीन पर तैरने लगा, हर तरफ एक ही सवाल गूंजने लगा कि क्या चौतरफा दबाव के आगे झुकते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने वाकई अपनी कुर्सी छोड़ दी है या इसके पीछे कोई गहरा खेल है।
सामने आया वायरल लेटर का सच
जब इस सनसनीखेज पत्र की गहराई से पड़ताल की गई, तो जो सच सामने आया उसने सबको चौंका दिया। यह पूरा मामला महज एक कोरी अफवाह और बड़ा फर्जीवाड़ा निकला। शरारती तत्वों द्वारा फैलाया गया यह दस्तावेज़ पूरी तरह जाली और एडिटेड है। इस पत्र को तैयार करने वाले से इतनी बड़ी चूक हुई है कि इस पर तारीख 25 सितंबर 2026 दर्ज की गई है, जबकि इसके आधिकारिक नंबर में साल 2025 का जिक्र है। सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव आयोग या राष्ट्रपति भवन की तरफ से ऐसे किसी भी त्यागपत्र की कोई पुष्टि नहीं की गई है। आयोग के भीतर चल रही सियासी गर्माहट का फायदा उठाकर किसी ने माहौल बिगाड़ने के लिए यह मनगढ़ंत खेल रचा है।
जब इस सनसनीखेज पत्र की गहराई से पड़ताल की गई, तो जो सच सामने आया उसने सबको चौंका दिया। यह पूरा मामला महज एक कोरी अफवाह और बड़ा फर्जीवाड़ा निकला। शरारती तत्वों द्वारा फैलाया गया यह दस्तावेज़ पूरी तरह जाली और एडिटेड है। इस पत्र को तैयार करने वाले से इतनी बड़ी चूक हुई है कि इस पर तारीख 25 सितंबर 2026 दर्ज की गई है, जबकि इसके आधिकारिक नंबर में साल 2025 का जिक्र है। सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव आयोग या राष्ट्रपति भवन की तरफ से ऐसे किसी भी त्यागपत्र की कोई पुष्टि नहीं की गई है। आयोग के भीतर चल रही सियासी गर्माहट का फायदा उठाकर किसी ने माहौल बिगाड़ने के लिए यह मनगढ़ंत खेल रचा है।

इस पत्र के फर्जी और जाली होने के मुख्य तकनीकी और तथ्यात्मक कारण निम्नलिखित हैं:
- तारीख और संदर्भ संख्या में विरोधाभास: पत्र के ऊपरी दाएं हिस्से में संदर्भ संख्या No. CEC/1/1/2025-Res. लिखी है (जिसमें वर्ष 2025 का जिक्र है), जबकि ठीक उसके नीचे तारीख 25 September, 2026 दर्ज की गई है। किसी भी आधिकारिक सरकारी पत्राचार में वर्ष का ऐसा बेमेल होना संभव नहीं है।
- गलत कानूनी संदर्भ (कानून का नाम): पत्र में इस्तीफे के लिए 'Chief Election Commissioner and other Election Commissioners (Conditions of Service) Act, 1991' का हवाला दिया गया है। केंद्र सरकार ने 1991 के इस पुराने कानून को निरस्त (repeal) कर नया कानून—The Chief Election Commissioner and other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023—लागू कर दिया है। किसी वास्तविक संवैधानिक पदधारक के आधिकारिक पत्र में निरस्त हो चुके कानून का उल्लेख नहीं होता।
- ड्राफ्टिंग और फॉन्ट की खामियां: पत्र में फॉन्ट का आकार, एलाइनमेंट और स्पेसिंग भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक प्रारूप और मानकों के अनुरूप नहीं है। इसे किसी साधारण वर्ड या पीडीएफ एडिटर के जरिए लेटरहेड की छवि पर टेक्स्ट बैठाकर तैयार किया गया प्रतीत होता है।
- आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं: मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा एक बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम होता है, जिसकी अधिसूचना राष्ट्रपति भवन, कानून मंत्रालय या भारतीय निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (eci.gov.in) और पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा तुरंत जारी की जाती है। किसी भी आधिकारिक मंच पर ऐसे किसी इस्तीफे का कोई रिकॉर्ड या पुष्टि मौजूद नहीं है।
अफवाहों से सावधान रहने की अपील
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने संवैधानिक पद पर पूरी तरह बने हुए हैं और आयोग की सभी बैठकें व कामकाज हमेशा की तरह सामान्य रूप से जारी हैं। देश की इतनी बड़ी संवैधानिक संस्था और उसके शीर्ष अधिकारियों को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी झूठी खबरें फैलाना बेहद गंभीर मामला है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता से साफ तौर पर अपील की है कि इंटरनेट पर चलने वाले ऐसे किसी भी दावे पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। जब तक सरकार या चुनाव आयोग खुद इसकी आधिकारिक पुष्टि न करे, तब तक इसे आगे शेयर करने से बचें।
---समाप्त---मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने संवैधानिक पद पर पूरी तरह बने हुए हैं और आयोग की सभी बैठकें व कामकाज हमेशा की तरह सामान्य रूप से जारी हैं। देश की इतनी बड़ी संवैधानिक संस्था और उसके शीर्ष अधिकारियों को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी झूठी खबरें फैलाना बेहद गंभीर मामला है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता से साफ तौर पर अपील की है कि इंटरनेट पर चलने वाले ऐसे किसी भी दावे पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। जब तक सरकार या चुनाव आयोग खुद इसकी आधिकारिक पुष्टि न करे, तब तक इसे आगे शेयर करने से बचें।