शनिवार को दिल्ली में चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई, जिसमें आम वोटरों को सीधी राहत देने वाले कई फैसले लिए गए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी इस बैठक में मौजूद रहे। आयोग ने साफ कहा है कि जिन लोगों के फॉर्म या वोटर कार्ड में कोई गड़बड़ी पाई गई है और उन्हें नोटिस मिला है, उन्हें अब दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बीएलओ खुद उनके घर जाएंगे, जरूरी कागजात लेंगे और सीधे ऑनलाइन पोर्टल पर चढ़ाएंगे। जब तक बहुत जरूरी न हो, किसी भी नागरिक को दफ्तर में सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। इसके साथ ही बेघर लोगों, मजदूरों और रैन बसेरों में रहने वालों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए खास कैंप लगाने का जिम्मा जिलों के अफसरों को सौंपा गया है।
आपत्तियां देने की तारीख बढ़ी
त्योहारों और लोगों की सुविधा को देखते हुए आयोग ने कुछ राज्यों में समयसीमा भी बढ़ा दी है। दिल्ली के अफसरों की मांग पर दावे व आपत्तियां देने की तारीख बढ़ाकर 30 अक्तूबर 2026 कर दी गई है, जिनका निपटारा 30 नवंबर तक होगा। वहीं महाराष्ट्र के लोगों को 12 अक्तूबर तक का समय मिला है, जहां मामलों का निपटारा 10 नवंबर तक किया जाएगा। बिहार और बंगाल समेत 20 राज्यों में गहन जांच का काम पूरा हो चुका है। जिन लोगों के नाम गलती से छूट गए हैं या जो नए वोटर बने हैं, वे अभी भी अपना फॉर्म भरकर नाम जुड़वा सकते हैं। इसके अलावा आयोग के कामकाज को खुला रखने के लिए बैठकों का एजेंडा पहले जारी करने और अफसरों के विदेश दौरे के नियम कड़े करने का फैसला भी हुआ।
सीईसी के इस्तीफे को लेकर सियासी घमासान
यह बैठक ऐसे वक्त में हुई है जब चुनाव आयोग के भीतर और बाहर दोनों जगह माहौल काफी गर्म है। आयोग के अंदर ही तीनों बड़े अफसरों के बीच कुछ फैसलों को लेकर खींचतान की चर्चा जोरों पर है। उधर कांग्रेस सहित अन्य सियासी दल मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा फैसले लेने के आरोप लगाते हुए लामबंद हैं और शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन भी हुए थे। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से फौरन पद छोड़ने की मांग की है। पार्टी ने 48 घंटे की मोहलत देते हुए ऐलान किया है कि अगर इस्तीफा नहीं आया, तो 2 अक्तूबर को पूरे देश में चक्का जाम और बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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