रामपुर, उत्तर प्रदेश: धर्म और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले श्री गुरु तेग बहादुर साहिब महाराज के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर, रामपुर जिले के बिलासपुर क्षेत्र में स्थित गांव नवाबगंज स्थित गुरुद्वारा हरगोविंद सर साहिब परिसर में एक विशाल धार्मिक समागम का आयोजन किया गया। समागम में गुरु तेग बहादुर साहिब के साथ-साथ उनके महान शिष्यों भाई मतीदास, भाई सतीदास, और भाई दयाला जी के अतुलनीय बलिदान को भी याद किया गया।

​हजारों की संख्या में पहुंची संगत को विभिन्न क्षेत्रों से आए रागी जत्थों ने अपने मधुर सबद-कीर्तन से भक्तों को निहाल किया, जबकि कविश्री और ढाडी जत्थों ने ओजस्वी शैली में गुरु साहिब के जीवन और सिख पंथ के गौरवशाली इतिहास का बखान किया।

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​इतिहास पर प्रकाश और गुरुवाणी का महत्व

​समागम के दौरान, कथावाचक हरप्रीत सिंह ने सिख गुरुओं के बलिदानी इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला, खासकर नौवें गुरु के उस अद्वितीय त्याग पर जिसकी मिसाल विश्व इतिहास में दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि किस तरह गुरु तेग बहादुर साहिब ने कश्मीर के पंडितों की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी और 'हिंद की चादर' कहलाए।


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​धार्मिक वक्ताओं में पटियाला जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद ने गुरुओं द्वारा स्थापित सर्वधर्म समभाव के आदर्शों पर अपनी बात रखी। वहीं, जैविक कृषि विज्ञानी भाई गुरमुख सिंह और विद्वान डॉ. गुरदेव सिंह ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गुरुवाणी के मूल्यों और शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने ज़ोर दिया कि गुरु साहिब के आदर्श आज भी समाज को एकजुटता और नैतिक बल प्रदान करते हैं।

​राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों का सम्मान और उपस्थिति

​इस महत्वपूर्ण आयोजन में क्षेत्र की अनेक राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने भी हिस्सा लिया। जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, एमएलसी हरिसिंह ढिल्लो, जयपाल सिंह व्यस्त, महिला आयोग की सदस्य सुनीता सैनी, पूर्व विधायक संजय कपूर और पालिकाध्यक्ष चित्रक मित्तल जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने गुरुद्वारे में शीश नवाया और देश व समाज की खुशहाली के लिए अरदास की।

​गुरुद्वारा हरगोविंद सर साहिब के संत बाबा अनूप सिंह ने इस अवसर पर अतिथियों और विशिष्ट सेवादारों को सम्मानस्वरूप सरोपे भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया।

​पूरे कार्यक्रम का संचालन गुरुद्वारा नानकमत्ता कमेटी के डायरेक्टर प्रतिपाल सिंह ने कुशलतापूर्वक किया। समागम के अंत में, विशाल संख्या में उपस्थित संगत ने गुरु के अटूट लंगर में श्रद्धापूर्वक प्रसाद छका, जिसका प्रबंध लखविंदर सिंह, दलबारा सिंह, सुरेंद्र सिंह, जसजीत सिंह, मलकीत सिंह बाजवा सहित अन्य निष्ठावान सेवादारों की टीम ने संभाला। यह समागम धार्मिक एकता, सेवा और त्याग की भावना का संदेश देकर संपन्न हुआ।

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