पूरी दुनिया अभी कोरोना के सदमे से उबर ही रही थी कि एक नई और अधिक जटिल मुसीबत ने दरवाजे पर दस्तक दे दी है। कैंडिडा ऑरिस नामक यह जानलेवा फंगस किसी खामोश शिकारी की तरह फैल रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे 'सुपरबग' की श्रेणी में रखा है क्योंकि इस पर आम दवाएं काम नहीं कर रही हैं। यह संक्रमण मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बना रहा है जो पहले से ही किसी बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। अमेरिका के ओरेगॉन, टेक्सास और फ्लोरिडा जैसे राज्यों में इसके हजारों मामले सामने आने से हड़कंप मच गया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह फंगस शरीर के खून में घुसकर मल्टी-ऑर्गन फेल्योर का कारण बन रहा है, जिससे मृत्यु दर में भी इजाफा देखा गया है।
दवाओं को ठेंगा दिखा रहा यह जिद्दी फंगस
इस नए खतरे की सबसे डरावनी बात यह है कि चिकित्सा विज्ञान के पास वर्तमान में इसका कोई सटीक तोड़ नहीं है। यह फंगस 'मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट' है, जिसका मतलब है कि दशकों से इस्तेमाल की जा रही एंटी-फंगल दवाएं इसके सामने घुटने टेक चुकी हैं। 2009 में पहली बार जापान में देखे गए इस जीव ने अब अपना रूप इतना बदल लिया है कि इसकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया है। अस्पतालों की सतहों, मेडिकल उपकरणों और बेड पर यह हफ्तों तक जिंदा रहता है। साधारण सैनिटाइजर और कीटाणुनाशक इसे खत्म नहीं कर पाते, जिससे यह एक मरीज से दूसरे मरीज तक आसानी से पहुंच रहा है। भारत में भी इसे लेकर पहले चेतावनी जारी की जा चुकी है, जो इसकी गंभीरता को दर्शाती है।
अस्पतालों के आईसीयू वार्ड बने इसके नए ठिकाने
कैंडिडा ऑरिस का प्रसार सबसे ज्यादा उन जगहों पर हो रहा है जहां स्वच्छता के उच्चतम मानक होने चाहिए। नर्सिंग होम और अस्पतालों के गहन चिकित्सा कक्ष इसके मुख्य केंद्र बन गए हैं। इस संक्रमण के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि शुरुआत में इसे पहचानना लगभग असंभव होता है। मरीज को अचानक तेज बुखार आता है और ठंड लगने लगती है, जिसे अक्सर सामान्य संक्रमण मान लिया जाता है। लेकिन जब भारी मात्रा में दी जाने वाली दवाओं के बावजूद बुखार नहीं उतरता, तब जाकर इस सुपरबग का पता चलता है। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह हृदय और मस्तिष्क तक को प्रभावित कर सकता है, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
सावधानी और सुरक्षा ही अब एकमात्र रास्ता
चूंकि इस बीमारी का कोई पुख्ता इलाज मौजूद नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है। बुजुर्गों, कैंसर रोगियों और शुगर के मरीजों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अस्पतालों में जाने वाले लोगों को मास्क पहनने और हाथों को बार-बार साबुन से धोने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अमेरिका के 28 राज्यों में अलर्ट जारी होने के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि इसे वैश्विक महामारी बनने से रोका जा सके। आधुनिक चिकित्सा जगत के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है, जहां एक सूक्ष्म जीव ने पूरी दुनिया की स्वास्थ्य सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है।
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