गाजियाबाद पुलिस ने शुक्रवार (2 जनवरी, 2026) को कौशाम्बी थाना प्रभारी को उस वक्त सख्त चेतावनी जारी की, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह कथित तौर पर एक झुग्गी बस्ती के निवासियों को धमकाते और उनकी राष्ट्रीयता निर्धारित करने के लिए एक उपकरण (डिवाइस) का उपयोग करने का दावा करते नजर आ रहे हैं।

​वीडियो में अधिकारी को एक व्यक्ति की पीठ पर स्मार्टफोन जैसा दिखने वाला उपकरण रखते हुए और उससे उसकी राष्ट्रीयता के बारे में पूछताछ करते देखा जा सकता है। अधिकारी को यह कहते सुना गया, "क्या तुम बांग्लादेशी हो? मशीन लगाओ। मशीन दिखा रही है कि तुम हो, है ना?" व्यक्ति जवाब देता है कि वह बिहार के अररिया जिले का रहने वाला है।

​इन्दिरापुरम के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा:

​"सोशल मीडिया के माध्यम से एक वायरल वीडियो संज्ञान में आया है। जांच में पाया गया कि यह वीडियो कौशाम्बी थाना क्षेत्र में स्थानीय पुलिस टीम द्वारा चलाए जा रहे 'एरिया डोमिनेशन' (क्षेत्र वर्चस्व) अभियान का है। इस दौरान अस्थाई बस्तियों और झुग्गियों में रहने वाले निवासियों से पूछताछ और सत्यापन किया जा रहा था।"​उन्होंने आगे बताया, "कौशाम्बी थाना प्रभारी निवासियों से बात कर रहे थे। अधिकारी को सख्त चेतावनी जारी की गई है ताकि भविष्य में इस तरह के व्यवहार की पुनरावृत्ति न हो। सभी तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।"


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​पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीयता का सत्यापन करना नहीं था, बल्कि यह अस्थाई बस्तियों में संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने के लिए एक नियमित सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा था। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने, जनता का विश्वास बढ़ाने और अपराध रोकने के लिए एरिया डोमिनेशन अभ्यास आयोजित किए जाते हैं। गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, "इनमें गहन गश्त, रूट मार्च और संवेदनशील या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में जांच शामिल है ताकि पुलिस का प्रभाव स्थापित हो और शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।"

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने कहा:

​"हमें राज्य पुलिस और प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं है कि वे ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, क्योंकि निर्देश ऊपर से आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में ऐसी घटनाएं रोज की बात हो गई हैं। हाईकोर्ट को इस पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेना चाहिए क्योंकि ये वीडियो न केवल राज्य का मजाक उड़ाते हैं, बल्कि कानून के शासन का पूर्ण उल्लंघन भी हैं।"

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