राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय की विशेष टीमों ने तड़के समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म ख़ान से जुड़े कई परिसरों में एक साथ प्रवेश किया। वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। यह पूरी छापेमारी रामपुर, सहारनपुर और देश की राजधानी दिल्ली के विभिन्न प्रमुख इलाकों में स्थित 10 अलग-अलग परिसरों पर एक साथ संचालित की जा रही है।
जांच एजेंसी के निशाने पर मुख्य रूप से आज़म ख़ान की महत्वाकांक्षी योजना 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' और इसका संचालन करने वाला 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट' है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों की कड़ी सुरक्षा के बीच अधिकारियों ने रामपुर स्थित विश्वविद्यालय परिसर, ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारियों के व्यक्तिगत आवासों, उनके वित्तीय सलाहकारों और सहारनपुर स्थित एक सीए के ठिकानों की नाकेबंदी कर दी। इस दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई और वहां मौजूद कागजात की सघन पड़ताल शुरू की गई।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले की जड़ें सरकारी विकास कार्यों के ठेकों में हुई गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों और निजी कंपनियों के माध्यम से धन को अन्यत्र भेजने के आरोपों से जुड़ी हैं। प्राथमिक जांच के नतीजों से संकेत मिलता है कि कई ठेकेदारों ने सरकारी योजनाओं से प्राप्त रकम का एक बड़ा हिस्सा गैर-कानूनी रास्तों से जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के बैंक खातों में डायवर्ट किया था। इस अवैध धन का उपयोग बड़े पैमाने पर चंदे के रूप में दिखाकर यूनिवर्सिटी की विशाल संपत्तियों के निर्माण और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में किया गया।
इस पूरे सर्च ऑपरेशन का प्राथमिक उद्देश्य वित्तीय धांधली से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime), शंकास्पद बैंक लेनदेन, अचल संपत्तियों के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को हासिल करना है। जांच अधिकारी मौके से कंप्यूटर हार्ड ड्राइव, लैपटॉप, वित्तीय लेखों से संबंधित फाइलें और संदिग्ध बिलों को अपने कब्जे में ले रहे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी की इस सख्त कार्रवाई के बाद से राज्य की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।
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