उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के जनहित, प्रशासनिक सुधार और ढांचागत विकास से जुड़े 15 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी गई है। इस उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य, श्रम, सहकारिता, परिवहन, कौशल विकास, औद्योगिक विकास और न्यायिक प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में कई दूरगामी निर्णय लिए गए।
बैठक का सबसे प्रमुख निर्णय प्रदेश के न्यायिक ढांचे को लेकर रहा, जिसके तहत हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में उपलब्ध 73 हेक्टेयर वन भूमि में से आवश्यकतानुसार लगभग 40 हेक्टेयर भूमि नए उच्च न्यायालय परिसर के निर्माण के लिए हस्तांतरित की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गो-पालन योजना का दायरा बढ़ा दिया है। अब सामान्य वर्ग के लोग भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे और उन्हें गाय तथा भैंस खरीदने पर राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली को अपनी हरी झंडी दे दी है। इसके लागू होने से समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था लागू होगी और हर महीने की सात तारीख तक मजदूरी का भुगतान अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य में खेल और युवाओं के विकास के लिए क्रीड़ा विश्वविद्यालय में 122 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है, जबकि जीएसटी संशोधन अध्यादेश को भी स्वीकार कर लिया गया है।
कैबिनेट ने सहकारिता और औद्योगिक क्षेत्र में भी बड़े सुधार किए हैं। अब सहकारी समिति नियमावली में बदलाव के बाद कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति भी समिति का सदस्य बन सकेगा। औद्योगिक क्षेत्र के लिए नई नियमावली मंजूर की गई है, जिससे नियोजकों और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा तथा छंटनी किए गए कर्मियों को दोबारा काम का अवसर मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त मेरठ-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेस-वे विस्तार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से समझौता करने और वन विकास निगम में स्केलर पद हेतु 100 अंकों की परीक्षा आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है।
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