नई दिल्ली, (उत्तराखण्ड तहलका): बीती 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए दिल्ली सीरियल ब्लास्ट मामले की जाँच में ED के एक्शन ने एक बड़ा मोड़ ला दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक और मैनेजिंग ट्रस्टी जावेद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। सिद्दीकी पर न केवल इस आतंकी साजिश में टेरर फंडिंग करने का आरोप है, बल्कि उनके खिलाफ जमीन हड़पने और जालसाजी के गंभीर मामले भी सामने आए हैं।
फंडिंग के तार और हवाला कनेक्शन
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जाँच में इस आतंकी मॉड्यूल को पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) हैंडलर द्वारा ₹20 लाख की हवाला फंडिंग किए जाने का खुलासा हुआ था। ED अब सिद्दीकी के वित्तीय लेनदेन की गहनता से जाँच कर रहा है और सिद्दीकी को इसी फंडिंग नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ED और अन्य एजेंसियाँ यह पता लगा रही हैं कि सिद्दीकी ने अपनी शैक्षिक और व्यावसायिक गतिविधियों की आड़ में किस तरह इस आतंकी नेटवर्क को वित्तीय सहायता पहुँचाई और मनी लॉन्ड्रिंग की।

जालसाजी: मृत व्यक्तियों के नाम पर जमीन हड़पने का आरोप
आतंकी फंडिंग के साथ-साथ, सिद्दीकी पर व्यापक भूमि घोटाले का भी आरोप लगा है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने अपने फाउंडेशन का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके के पास करीब 65 भूस्वामियों की खेती की जमीन को अवैध तरीके से हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
चौंकाने वाला विवरण: आरोप है कि इन भूस्वामियों में से लगभग 30 लोग ऐसे थे जिनकी मृत्यु जमीन के कागजात पर हस्ताक्षर होने से पहले ही हो चुकी थी। यह स्पष्ट रूप से संपत्ति के हस्तांतरण में बड़े पैमाने पर जालसाजी की ओर इशारा करता है।
बड़ी साजिश का खुलासा और अन्य गिरफ्तारियाँ
सिद्दीकी की गिरफ्तारी, 6 मुख्य आरोपियों को हिरासत में लेने की NIA की कार्रवाई की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में डॉक्टर (जैसे डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई, डॉ. अदील अहमद राथर और 'मैडम सर्जन' डॉ. शाहीन सईद) और मौलवी (जैसे मुफ्ती इरफान अहमद वगाय) शामिल हैं, जो लॉजिस्टिक्स और ऑन-ग्राउंड सपोर्ट प्रदान कर रहे थे।
यह भी पढ़े: मुरादाबाद: 10 लाख की फिरौती के लिए कर डाला युवक का अपहरण, जानें फिर क्या हुआ?
जाँच में खुलासा हुआ है कि आतंकियों ने पहले दिल्ली के उच्च-सुरक्षा क्षेत्रों में रॉकेट बम और ड्रोन-आधारित हमलों की योजना बनाई थी। NIA ने विस्फोट में इस्तेमाल अमोनियम नाइट्रेट की पुष्टि की है और एक AK-47 राइफल की भी बरामदगी की है। यहाँ तक कि इस साजिश में अयोध्या के राम मंदिर जैसे अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाने की भी योजना थी।
शैक्षिक आवरण में आपराधिक नेटवर्क पर ED का शिकंजा
जावेद अहमद सिद्दीकी की गिरफ्तारी ने समाज में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि किस तरह एक उच्च-स्तरीय शैक्षिक संस्थान के मुखिया ने अपनी प्रतिष्ठा का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों और वित्तीय अपराधों के लिए किया। NIA और ED अब इस पूरे आपराधिक-आतंकी मॉड्यूल के वित्तीय, संगठनात्मक और वैचारिक आधार को तोड़ने के लिए संयुक्त रूप से पूछताछ कर रहे हैं। जाँच एजेंसियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे UAPA (गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) और PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत कार्रवाई करते हुए इस साजिश के हर मास्टरमाइंड और फाइनेंसर तक पहुँचने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
---समाप्त---