चंपावत जिले के लोहाघाट स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान में शनिवार की वह दोपहर किसी सामान्य दिन जैसी बिल्कुल नहीं थी। फार्मेसी प्रथम वर्ष की छात्राएं अपनी प्रयोगशाला के भीतर रसायनों के रहस्यों को समझने में जुटी थीं कि तभी अचानक एक ऐसी अनहोनी घटी जिसने पूरे परिसर को हिलाकर रख दिया। लैब की दीवारों के बीच एक ऐसा खौफनाक मंजर पैदा हुआ कि देखते ही देखते पूरा कॉलेज परिसर चीख-पुकार और बदहवासी के माहौल में डूब गया। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि विज्ञान का यह प्रयोग कुछ ही पलों में एक भयानक आपदा का रूप ले लेगा और हंसती-खेलती छात्राओं के जीवन पर मौत का साया मंडराने लगेगा। जहरीली गैस के रिसाव से एक शिक्षिका और सात छात्राएं बेहोश हो गईं, जिनमें से दो की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।
शिक्षिका सहित सात छात्राएं गैस की चपेट में आईं
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की चपेट में आने से प्रयोगशाला में मौजूद शिक्षिका शैलजा और सात छात्राएं गरिमा, निकिता, गुंजन, काजल, दिया, संजना और शिवानी गंभीर रूप से प्रभावित हुईं। घटना के तुरंत बाद कॉलेज के अन्य शिक्षकों और स्टाफ ने साहस दिखाते हुए प्रभावितों को सुरक्षित बाहर निकाला और एम्बुलेंस के माध्यम से लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय पहुँचाया। अस्पताल प्रशासन को सूचना मिलते ही डॉक्टरों की टीम को अलर्ट कर दिया गया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विराज राठी ने बताया कि भर्ती मरीजों को सांस लेने में भारी तकलीफ, आंखों में तेज जलन, लगातार खांसी और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो रही हैं। वर्तमान में फिजिशियन डॉ. राकेश जोशी, डॉ. ज्ञान प्रकाश और डॉ. रितु की टीम उनकी निगरानी कर रही है जिनमें से दो की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।
ऐसीटल क्लोराइड की संवेदनशीलता और जांच के घेरे में मानक
ऐसीटल क्लोराइड एक अत्यंत संवेदनशील और संक्षारक रसायन माना जाता है जिसका उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है। यह रसायन हवा या नमी के संपर्क में आते ही हाइड्रोजन क्लोराइड जैसी घातक गैस छोड़ता है जो सीधे श्वसन तंत्र और आंखों पर हमला करती है। इस हादसे के बाद पॉलिटेक्निक प्रशासन ने आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या प्रयोगशाला में सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन किया गया था और क्या छात्राओं के पास मास्क, ग्लव्स या गॉगल्स जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे। कॉलेज प्रबंधन अब इस बात की समीक्षा कर रहा है कि बोतल फटने के पीछे मानवीय चूक थी या फिर रसायनों के भंडारण में लापरवाही बरती गई थी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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