नई दिल्ली। ​प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक दिलचस्प मोड़ आया। जोधपुर जेल में बंद वांगचुक ने अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी, जिसका केंद्र सरकार ने कड़ा विरोध किया।

​जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की खंडपीठ के सामने यह मामला तब आया, जब वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे अंगमो, द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इस याचिका में वांगचुक की हिरासत को 'अवैध, मनमाना' और 'मौलिक अधिकारों का हनन' करार देते हुए चुनौती दी गई है।

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​वकील सिब्बल ने रखी मांग, SG मेहता ने किया विरोध


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​याचिकाकर्ता अंगमो का पक्ष रखते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को सूचित किया कि उनके मुवक्किल (वांगचुक) जेल से ही वीडियो लिंक के जरिए अदालत के समक्ष अपनी बात रखना चाहते हैं, और इसके लिए उन्होंने न्यायालय से अनुमति मांगी।

​हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस विशेष सुविधा का पुरजोर विरोध किया। मेहता ने तर्क दिया कि, "हमें देश भर के सभी विचाराधीन कैदियों/दोषियों के साथ एक समान व्यवहार करना होगा।" उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि एक व्यक्ति को VC की अनुमति देने से न्यायिक प्रक्रिया में एक नई मिसाल कायम हो सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई की तारीख 15 दिसंबर तक के लिए टाल दी है।

​लद्दाख विरोध और NSA की पृष्ठभूमि

​वांगचुक की यह हिरासत लद्दाख में राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) लागू करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी है। उन्हें 26 सितंबर को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। सरकारी पक्ष का आरोप है कि वांगचुक ने इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई थी।

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